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' श्रीमद् भगवत गीता- जीवन दर्शन जेन जी के विशेष परिपेक्ष में , 'गोष्ठी का आयोजन हुआ



श्रीमद् भगवत गीता- जीवन दर्शन जेन जी के विशेष परिपेक्ष में : गोष्ठी का आयोजन हुआ

इंदौर । भारत विकास परिषद तिलक शाखा द्वारा *श्रीमद् भगवत गीता- जीवन दर्शन जेन जी के विशेष परिपेक्ष में* इस विषय पर एक महत्वपूर्ण गोष्ठी का आयोजन हुआ।
मुख्य अतिथि देवपुत्र के संपादक श्री गोपाल माहेश्वरी जी ने उद्बोधन देते हुए कहा-जिसे लगता है उसे सब आता है वह अज्ञानी है और सच्चा ज्ञानी वही है जो सोचता है अभी मुझे बहुत कुछ सीखना है। आज की देन जी के सामने द्वंदात्मक स्थित है। ना पूरी तरह नास्तिक है ना पूरी तरह आस्तिक।
दरअसल भारतीय युवाओं के मानस को समझने के लिए भारतीय ज्ञान परंपरा के सांचे में डालकर उसे तरह देखना पड़ेगा जिस तरह अंगूठी में नग फिक्स होता है। जिस तरह कृष्ण ने अर्जुन को पहले समझा फिर उसे समझाया।जैसे शिक्षक पहले शिष्य को समझता है फिर उसे समझाना है इसी तरह जेन जी पर भी यह बात लागू होती है। इस पीढ़ी को थोपिये नहीं, उपदेश नहीं दीजिए।जब जेन जी आपको समझ जाएगी तब वह बिल्कुल रहेगी कि जो आप कहेंगे मैं वही करूंगा। गीता के महत्वपूर्ण बिंदु है कि वह कर्म करने की प्रेरणा देती है।
इस इस प्रेरणादाई आयोजन के संयोजक रहे सुनील कुलकर्णी व सुबोध सावले ने स्वागत किया। अध्यक्ष जी उद्बोधन अध्यक्ष अनिल अग्रवाल ने दिया। स्मृति सिन्हा सचिव सुभाष वर्मा और नवोदित पाटनी में प्रदान किया। संचालन रेखा छारिया ने किया।
देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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