काव्य :
नारी
विचित्र विलक्षण विचारणीय,
घर घर की वाणी नारी।
कलरव करती किलकारी,
आँगन आँगन चहकी नारी।
प्राणप्रिया प्रेयसी परिणीता,
मानस मन मंहकी नारी।
माँ ममत्व ममता मातृत्व,
ह्रदय ह्रदय पिघली नारी।
घर बाहर डगर अंबर,
आई भाई छायी नारी।
अनन्त अकल्पनीय अंतस,
उन्मुक्त अलसाई अंगड़ाई नारी।
काव्य कला कल्प कथा,
कालातीत सृजन शक्ति नारी।
- प्राची शर्मा पांडे "परिणीति"
इंदौर मध्यप्रदेश
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