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‘सतमोला कवियों की चौपाल’ का दिन रहा ऐतिहासिक एवं यादगार



‘सतमोला कवियों की चौपाल’ का दिन रहा ऐतिहासिक एवं यादगार

‘राष्ट्र साधना के 100 वर्ष’ काव्य संध्या के अंतर्गत चार विशेष एपिसोड की शूटिंग  एवं कवि-सम्मेलन

बम्होरी ।  ‘सतमोला कवियों की चौपाल’ के लिए 18 अक्टूबर, रविवार का दिन विशेष उपलब्धियों से परिपूर्ण रहा।अखिल भारतीय साहित्य परिषद् के अनुष्ठान राष्ट्र साधना के 100 वर्ष’ काव्य संध्या के निमित्त चार विशेष एपिसोड की शूटिंग सम्पन्न हुई। इस अवसर पर देशभर से पधारे प्रतिष्ठित कवियों ने अपनी ओजस्वी, राष्ट्रभाव से ओतप्रोत एवं प्रभावशाली रचनाओं से वातावरण को काव्यमय बना दिया। इन कवियों में कार्यक्रम में ज्ञानंदा स्कूल के अध्यक्ष एवं आर्य बुक डिपो के आदरणीय श्री अशोक गुप्ता जीनतथा शब्दोत्सव एवं शब्दोत्सव कैफे के सहसंयोजक श्री अनिल पांडेय जी मुख्य अतिथि के रूप में पधारे।
विशिष्ट अतिथियों के रूप में सुप्रसिद्ध आयुर्वेदाचार्य डॉ. धर्मवीर मलिक योगी, मानद निदेशक श्री नीरज त्यागी जी, निदेशक डॉ. परमेश्वर दयाल पुष्कर जी तथा सुप्रसिद्ध शायरा श्रीमती सरिता जैन जी की गरिमामयी उपस्थिति रहीं।
कार्यक्रम का एक विशेष आकर्षण चार पुस्तकों का भव्य लोकार्पण रहा। इस अवसर पर साहित्य सृजन, रचनात्मक अभिव्यक्ति और पुस्तक संस्कृति के प्रति सम्मान का भाव विशेष रूप से दिखाई दिया।
कार्यक्रम में देशभर से पधारे लगभग 35 कवियों का काव्य-पाठ और उनकी प्रकाशित पुस्तकों और उनके साहित्यिक जीवन पर चर्चा की गई।
सर्वश्री विनीत कुमार राय बनारस, महेंद्र भट्ट ग्वालियर, डॉक्टर परमेश्वर दयाल पुष्कर सोनभद्र, सत्येंद्र बदायूँ, सीमा शुक्ला अयोध्या, नीतू सिंह चौहान लखनऊ ने काव्य-पाठ किया। ईसके बाद पण्डित जुगल किशोर त्रिपाठी, बम्हौरी, मऊरानीपुर, झाँसी, ने शानदार काव्य प्रस्तुति देकर आयोजन को यादगार बना दिया। पं० त्रिपाठी की कविताओं में राष्ट्रभक्ति, आध्यात्मिकता, सामाजिक समरसता, भारतीय संस्कृति, राष्ट्रीय चेतना और सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन के स्वर प्रमुखता से उभरे। उन्होंने 'प्रेम', 'मैं शिक्षक हूँ', सर्वस्वरूपा नारी विषय पर  काव्य-पाठ कर अपनी महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ बतायीं।
डॉ. प्रवीण आर्य संस्थापक व निर्माता सतमोला कवियों की चौपाल ने अन्त में सभी अतिथियों और साहित्यकारों का आभार व्यक्त करके उन्हें प्रमाण-पत्र, सतमौला पैकटों को प्रदान कर विदाई दी।
देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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