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पेड़-पौधे भगवान स्वरूप सृष्टि के पालनहार इन्हें काटें नहीं बढ़ाये - स्वामी ब्रह्म योगानंद जी




 पेड़-पौधे भगवान स्वरूप सृष्टि के पालनहार इन्हें काटें नहीं बढ़ाये - स्वामी ब्रह्म योगानंद जी 

जितना पौधों का रोपण आवश्यक, उतना ही संरक्षण - राज चड्डा 

एक पेड़ अपने 50 साल के जीवन काल में देता है 16 करोड़ की सेवाएं - शुभम चौधरी 

ग्वालियर। देशभर में बढ़ते तापमान के बीच लोगों में पेड़ लगाने की खूब चर्चा हो रही है। इसी बीच शनिवार को दाना पानी फॉर बर्ड्स समूह ने रामकृष्ण आश्रम के छात्रों के साथ सिटी सेंटर स्थित शारदा बालग्राम में 350 पौधों का रोपण किया। कार्यक्रम में उपस्थित स्वामी ब्रह्म योगानंद जी ने संबोधित करते हुए कहा पेड़-पौधे भगवान स्वरूप सृष्टि के पालनहार हैं। इन्हें काटें नहीं बढ़ाये यही मनुष्य जाति से अपील है।

दाना पानी फॉर बर्ड्स समूह के संयोजक राज चड्ढा ने पेड़-पौधों के फायदे बताते हुए कहा जितना पेड़-पौधों का रोपण आवश्यक है उतना ही संरक्षण। एक पेड़ 10 पुत्र समान है। एक दफा पुत्र कुपुत्र हो सकता है, पेड़ पौधे नहीं। आज से प्रत्येक रविवार दाना पानी फॉर बर्ड्स समूह शारदा बालग्राम श्रमदान करेगा। जिसमें नए पौधों का रोपण और जो रोपण किए है उनका संरक्षण करेगा।

वही समाजसेवी शुभम चौधरी ने कहा एक अध्ययन के अनुसार एक पेड़ अपने 50 साल के जीवन काल में 16 करोड़ की सेवाएं देता है। एक पेड़ की आर्थिक कीमत कितनी होती है, यह जानने के शुरुआती प्रयास भारत में ही हुए थे। 1979 में कलकत्ता यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉ.तारक मोहन दास ने एक अध्ययन किया था, जिसमें उन्होंने एक पेड़ की कीमत बताई थी। 

डॉ.दास ने बताया था कि एक पेड़ अपने 50 साल के जीवन में 2 लाख डॉलर (1979 की दर) की सेवाएं देता है। इन सेवाओं में ऑक्सीजन का उत्सर्जन, भूक्षरण रोकने, मिट्टी उर्वरक बनाने, पानी रिसायकल करने और हवा शुद्ध करने जैसी सेवाएं शामिल हैं। अगर वर्तमान में 2 लाख डॉलर की गणना भारतीय रूपये में की जाए तो आज एक पेड़ की सेवाओं की कीमत करीब 16 करोड़ रुपए होती है। एक अन्य अध्ययन दिल्ली के एक एनजीओ दिल्ली ग्रीन्स ने 2013 में किया था। इसके मुताबिक एक स्वस्थ पेड़ साल में जितनी ऑक्सीजन देता है, अगर उसे खरीदने जाएं तो कीमत 30 लाख रुपए से भी ज्यादा होगी। यूं तो एक-एक पेड़ हमारे जीवन में कितना अमूल्य है यह हम जानते ही है, लेकिन आर्थिक रूप में यह आंकड़े यह तो बताते ही हैं कि पौधे लगाने और उसका संरक्षण करने का हमारा प्रयास कितना महत्वपूर्ण है।

 प्रेषक -  मुकेश तिवारी वरिष्ठ पत्रकार ग्वालियर

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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