नई नई सौगाते होंगी!!
दुखिया के आँगन में फिर से
गौने की कुछ बातें होंगी!!
बादल खेत खेत बरसेंगे,
भीगी भीगी रातें होंगी!!
अबला के आंखो से झरती,
खुशियोँ की बरसातें होगी!!
पढ़ लिख कर लल्लू बैठा है
उसके हित भी बातें होगी!!
छीन छीन कर धन बाँटोगे
दाता संग ही घाते होगी!!
सोचा, कोई कभी नहीं था,
ऐसी भी खुराफातें होगी!!
रोती न्याय मांगती जनता,
हवा हवाई बातें होंगी!!
- सुरेश गुप्त ग्वालियरी
विंध्य नगर बैढ़न
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काव्य
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