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चरित्र हीन कौन ? - उषा सक्सेना,भोपाल


 

चरित्र हीन कौन ? 

आज फिर हवा में एक प्रश्न उछला है चरित्र हीन कौन ? मेरी ही प्रिय सखी पर यह आरोप लगा ।आरोप लगाने वाले और कोई नहीं स्वयं अपने ही आरोपी थे। प्रायःइस शब्द का प्रयोग स्त्रियों के चरित्र पर उंगुली उठा कर ही तो किया जाता है और उसे दोषी मान कर अकेले ही दण्डित कर दिया जाता । जब की सत्यता यह होती है कि उसे इतना मजबूर कर दिया जाता है कि वह टूटन या झुकने पर विवश हो जाये ।उसके न मानने पर उसे अनेक प्रकार से प्रताड़ित कर उसका मानसिक संतुलन भी असंतुलित कर दिया जाता है कि वह टूटने पर विवश हो जाये ।बाद में कामी पुरुष उसे अपनी हविश का शिकार बना कर समाज में उसे ही चरित्र हीन घोषित कर देता है और वह स्वयं बेदाग रह जाता है। 

यही तो विडम्बना है । सच पूंछा जाये तो चरित्र हीन स्त्री नही पुरुष होता है जिसने स्वयं आचरण हीन होकर  उसे इस गर्त में धकेला । उसे इस गर्त में ढकेलने वाले स्वयं उसके अपने ही तो होते हैं दूसरा कोई और नहीं। सबसे अधिक बदनाम करने वालों मे भी ऐसी महिलायें ही सबसे अधिक आगे रहती हैं जिन्हें चटकारे लेकर ऐसी बातों में अधिक आनंद आता है ।उनके चर्चा के विषय भी तो गहने कपड़े खाने पीने से लेकर यही होते हैं ।अब जबकि समय बदल गया और नारी अपने घर से बाहर काम करने निकली है तो स्वाभाविक है उसके सम्पर्क भी विस्तृत होंगे । आज हमें अपनी  मानसिकता को बदलना होगा ।स्त्री और पुरुष की समानता की बात जब हम करते हैं तो केवल स्त्री ही नहीं पुरुष भी समान रूप से उसका भागीदार होगा और जब यह भागीदारी सुनिश्चित हो जायेगी तो अकेली स्त्री ही क्यों पुरुष को भी  समान रूप से समाज में चरित्रहीन कहकर दण्डित किया जाना चाहिये । चरित्र हीन की परिभाषा दोनों के लिये समान हो‌ केवल एक के लिये नहीं ।आज बलात्कार से पीड़ित महिलाओं को केवल शारीरिक प्रताड़ना ही नहीं वरन मानसिक प्रताड़ना भी झेलनी पड़ती है ।उसका घर से निकला दूभर हो जाता है। घरवाले शर्म से परेशान । यह समाज उन्हें इज्जत से जीने भी नहीं देता ।बलात्कारी मूंछों पर ताव दे शान से नये शिकार खोजते रहते हैं और उनके घरवाले उसके इस दुष्चकृत्य में भी उसका ही साथ देते हैं ,क्यों कि वह बेटा है बेटी नहीं।  अब जब बेटियां घर से बाहर निकली हैं तो उन्हें भी अपनी स्वयं की सुरक्षा के लिये लड़ना होगा । अधिकार खैरात में मांगने पर नहीं लड़ने पर मिलता है ।अत:अपनी लड़ाई स्वयं लड़ने के लिये तैयार रहो और अपने माथे से चरित्र हीन का दाग मिटा समान अधिकार प्राप्त करो।

- उषा सक्सेना,भोपाल

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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