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काव्य : लकड़ी के चूल्हे - डॉ ब्रजभूषण मिश्र , भोपाल


 लकड़ी के चूल्हे


वो दिन दूर चले गए,

हम इतने खुशनसीब न रहे अब,

चूल्हे ,चौके बदल गए,

नही मिलती लकड़ी के चूल्हे पर सिकी, 

मीठी , गरम रोटियां 

मां ,भाभी या बहनों के हाथ की बनी,

हमने रोटी के साथ, रिश्तों की 

गरमाहट और मिठास ,सब खो दीं 

हम किसको जिम्मेदार कहें

समय को

या स्वयं को *ब्रज*



- डॉ ब्रजभूषण मिश्र , भोपाल

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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