महालय श्राद्ध 2024
पुरखों के तर्पण हेतु 18 सितंबर बुधवार से पितृपक्ष पखवाड़ा प्रारंभ होगा कहते हैं इस पखवाड़े में पितृ लोक के दरवाजे खुल जाते हैं और पितृ पुरुष किसी न किसी रूप में आकर अपने परिजनों के दरवाजे पर खड़े हो जाते हैं वह अन्न जल की इच्छा पूर्ति हेतु आते हैं इच्छापूर्ति हो जाने के पश्चात आशीर्वाद देकर विदा हो जाते हैं ऐसा ही समय पूर्वजों को मनाने का शुरू हो रहा है पूर्वजों के प्रसन्न होने से वंश वृद्धि, कुल वृद्धि, धन वृद्धि ,लक्ष्मी कीर्ति यश वृद्धि होती है इस बार श्राद्ध पक्ष में कोई भी तिथि खंडित नहीं है प्रतिपदा से लेकर सर्व पितृ मोक्ष अमावस्या तक प्रत्येक दिन अलग-अलग श्रद्धा होंगे ।18 सितंबर को स्नान दान पूर्णिमा के साथ पितृ तर्पण प्रथम श्राद्ध होगा ,19 तारीख को द्वितीया श्रद्ध ,20 तारीख को तृतीया श्राद्ध ,21 तारीख को चतुर्थी श्रद्ध, 22 तारीख को पंचमी श्राद्ध 23 तारीख को षष्टी श्रद्ध, 24 तारीख को सप्तमी श्रद्ध,25 तारीख को अष्टमी श्रद्ध, 26 तारीख को नवमी श्राद्ध जो माता के लिए होता है किया जाएगा। इसी प्रकार 27 तारीख को दशमी श्राद्ध, 28 तारीख को एकादशी श्राद्ध, 29 तारीख को द्वादशी श्रद्ध सन्यासियों के लिए होगा। 30 तारीख को त्रयोदशी श्राद्ध ,1 अक्टूबर को चतुर्दशी श्राद्ध शस्त्र घात अकाल मृत्यु वालों के लिए होगा, 2 अक्टूबर को अज्ञात तिथि श्रद्धा सर्व पितृ मोक्ष श्राद्ध किया जाएगा इसके साथ ही श्राद्ध पक्ष महालय का यह पखवाड़ा श्रद्धा के साथ पूर्ण होगा श्राद्ध करने के लिए श्रद्धा की आवश्यकता होती है श्रद्धा से किया गया कार्य पितरों के निमित्य पितरों को मोक्ष गति प्राप्त कराता है ब्राह्मण,गाय ,कौवा, चींटी,कुत्ता आदि पांच ग्रास के रूप में पितरों के निमित्त भोजन प्राप्ति के अधिकारी होते हैं प्रत्येक मनुष्य को अपने जीवन में अपनी प्रसन्नता की प्राप्ति हेतु पितरों को प्रसन्न करना आवश्यक माना गया है पितृ जब अपने परिजनों के दरवाजे आते हैं और वहां पर उन्हें यथोचित सम्मान प्राप्त नहीं होता तो वह नाराज होकर चले जाते हैं फिर अगले वर्ष ही आते हैं एक दिन का दिया हुआ ग्रास अन्न जल उन्हें पूरे वर्ष भर तरो ताजा पौष्टिकता प्रदान करता है एवं सदगति की प्राप्ति कराता है जय गुरुदेव ।
- पंडित विनोद गौतम ,भोपाल

