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पुरुष की विकृत मानसिकता को उजागर करता है तपस्वी- हीरालाल राजस्थानी


 पुरुष की विकृत मानसिकता को उजागर करता है तपस्वी- हीरालाल राजस्थानी

दिल्ली । दलित लेखक संघ के तत्वाधान में एफ 19, मिडिल सर्कल कनॉट प्लेस नई दिल्ली के विशाल चावड़ा सभागार में युवा लेखक सुनील पंवार के उपन्यास ‘तपस्वी’ पर चर्चा का आयोजन हुआ।

जिसमें दिल्ली के प्रसिद्ध वरिष्ठ और समकालीन प्रतिष्ठित लेखकों और अनेक बुद्धिजीवियों ने हिस्सा लिया।

 अध्यक्षता कर रहे हीरालाल राजस्थानी ने कथा शैली की तारीफ़ करते हुए कहा कि यह उपन्यास एक पुरुष की विकृत मानसिकता को बहुत मजबूती से उकेरता है। साहित्य अकादमी से सम्मानित लेखक रामस्वरूप किसान ने उपन्यास के नायक पर टिप्पणी करते हुए कहा कि मैं इस उपन्यास को मामूली नहीं मानता। जिस रचना में रस निष्पति हो,रोचकता हो वह मामूली नहीं होती।आगे इस उपन्यास के नायक के संदर्भ में बोलते हुए कहा कि नायक गंदी बस्ती से निकला हीरा है। मैं इसे रोचक और लोकप्रिय साहित्य के अंतर्गत रखूंगा।

वरिष्ठ लेखक कुसुम वियोगी ने इसे सामान्य उपन्यास बताते हुए इसकी रोचकता और शैली की सराहना की।

 वरिष्ठ लेखक जयप्रकाश कर्दम ने इसे तथ्यों से परे का लेखन करार दिया।

डॉ राजकुमारी, पुरुष आक्रोश और स्त्री संघर्ष की कथा कहा और कथावस्तु को मौलिक कथा बताते हुए भाषा की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि ये एक नारी प्रधान उपन्यास है तथा दृश्य ऐसे है जैसे कोई साउथ इंडियन एक्शन मूवी देख रहें हों। स्त्री चुनौती,संघर्ष, सशक्तिकरण के उद्देश्य को लेकर उपन्यासकार चले और सफ़ल भी हुए हैं। हिंदी के जानेमाने लेखक प्रभात रंजन ने इसकी हिंदी साहित्य की लोकप्रिय धारा का उपन्यास मानते हुए शैली की प्रशंसा की। उपन्यासकार अंजू शर्मा, कथा साहित्यकार विवेक मिश्र, इला जायसवाल ने भी उपन्यास पर अपने-अपने विचार प्रकट किए। मंच संचालन बलबिंद्र बलि ने तथा धन्यवाद भारत भूषण भीम ने किया।

इस अवसर पर देश भर से आए लेखकगण, श्रोता व शोधार्थी मौजूद रहे।

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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