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काव्य : आओ पितर और पुरखों आओ -बिन्दु त्रिपाठी, भोपाल


 

काव्य : 

आओ पितर और पुरखों आओ


आओ पितर और पुरखों आओ,

पुण्य धरा पर स्वागत है l

श्रद्धा भाव से जो अर्पण है,

प्रेम भाव से तुम भी पाओ l

ऊँगली थाम चलना सिखलाया,

जीवन को तुमने धन्य बनाया l

छोड़ हमें सुरधाम गए तुम,

लेकिन भूले नहीं तुम्हें हम l

पितृ पक्ष में तर्पण करते,

यथा योग्य हम दान भी करते l

दान दक्षिणा देते पंडित को,

भोजन सुस्वादु जिमाते l

श्रद्धा सुमन समर्पित है तुमको,

आशीर्वाद सदा तुम देना l

सुखी और समृद्ध रहें हम,

कृपा दृष्टि ऐसी तुम रखना l

भूल चूक जो हुई हो हमसे,

संतति जान क्षमा कर देना l

पितरों सदा नमन है तुमको,

सिर पर आशीष बनाये रखना l

- बिन्दु त्रिपाठी, भोपाल

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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