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व्यंग्य : सांप की रेल यात्रा' - जय प्रकाश पाण्डेय, जबलपुर


 व्यंग्य

          'सांप की रेल यात्रा'

                बीचों - बीच में बड़ा प्लेटफार्म हो और प्लेटफार्म के इधर भी सवारी गाड़ी खड़ी हो और उधर भी सवारी गाड़ी खड़ी हो तो कई बार बड़ा लफड़ा बन जाता है। पितृपक्ष चल रहा है इन दिनों स्टेशन में बहुत भीड़ होती है, लोग गया जाकर पितरों का श्राद्ध करते हैं । हमारी रेलगाड़ी राष्ट्रीय एकता की मिसाल के साथ साम्प्रदायिक सौहार्द का उदाहरण पेश करने में सबसे आगे रहती है। पितृपक्ष में रेल यात्री अपने अलावा पुरखों के नाम की भी टिकिट लेकर "गया "तक की यात्रा पुरखों की कराते हैं और ये हमारी रेलगाड़ी पितरों को मोक्ष दिलाने में अहम भूमिका निभाती है। गंगू अपने भाई के साथ 'गया' जा रहा है और उसने तीन बर्थ का रिजर्वेशन लिया है गंगू के स्वयं के नाम पर एक बर्थ, भाई के नाम पर एक बर्थ और एक बर्थ अपने दिवंगत पिता के नाम पर..... प्लेटफार्म में रेलमपेल भीड़ है। प्लेटफार्म के इस तरफ गया जाने वाली गाड़ी खुलने को तैयार है और इसी प्लेटफार्म के उस तरफ मुंबई को जाने वाली गरीब रथ चलने के लिए सीटी मार रही है। रेलमपेल भीड़ में गंगू के दिवंगत पिता की आत्मा भीड़ की धक्कामुक्की में गरीब रथ से टकरा जाती है और रेंगती हुई चल पड़ी गरीब रथ के जी-3 कोच में प्रवेश कर जाती है। गरीब रथ मुंबई की ओर स्पीड पकड़ लेती है, जब आत्मा खड़े खड़े थक जाती है तो 23 नंबर की खाली पड़ी बर्थ में लेट जाती है, नींद लग जाती है, सुबह हुई तो कसेरा स्टेशन पर लोग चाय पीते ,इडली खाते नजर आए, बाजू के बर्थ से आवाज आई आज ये गाड़ी मुंबई आधा घंटे लेट पहुंच पाएगी... आत्मा ने सुना कि ये गाड़ी मुंबई जा रही है, इसका मतलब गया नहीं जा रही है, आत्मा ने आस-पास गंगू और भाई की तलाश की, कहीं नहीं दिखे तो आत्मा घबरा गई, सामने से टीटीई आता दिखा, आत्मा को मालुम था कि बिना टिकट यात्रा करना अपराध है, जेल हो जाती है, किसी की सुनवाई नहीं होती, इसीलिए आत्मा ने टीटीई को डराने के लिए पांच फुट लम्बे जहरीले सांप का रूप धर लिया और 23 नंबर की बर्थ पर चहलकदमी करने लगी, टीटीई तो डर कर चुपचाप भाग खड़ा हुआ पर एक यात्री ने 23 नंबर की बर्थ पर जहरीले सांप को उठते बैठते देख लिया और चुपके से वीडियो बना कर वाइरल कर दिया। यात्री अपने परिवार के लोगों को वहां से लेकर दूसरी सीट की ओर भागा,इस दौरान उसने अन्य यात्रियों को बताया, कोच में भगदड़ मच गई, सांप को देखने भीड़ व्याकुल हो गई।देखते ही देखते यात्री सांप के डर से कोच छोड़कर दूसरे कोच में चले गए,इस दौरान उन्होंने रेलवे को इसकी जानकारी दी, लेकिन रेलवे वाले भी कोच में सांप की तलाशी नहीं कर पाए   इसीलिए रेलवे वालों ने कोच खाली कराके कोच लाक कर दिया, और गाड़ी मुंबई के लिए रवाना कर दी।जब सांप का वीडियो वायरल हुआ तो पत्रकारों को अच्छा मसाला मिल गया , कुछ पत्रकार छत्रपति शिवाजी टर्मिनल पहुंच गए, गरीब रथ रुकते ही यात्रियों के इंटरव्यू लेने लगे, एक ने कहा - रेलवे अभी तक चूहे - काकरोचों को यात्रियों की सेवा में साथ रखती थी अब सांप को भी निःशुल्क यात्रा कराने लगी है। दूसरे ने कहा - यात्रियों को बर्थ तो मिलती नहीं रेलवे अब सांप से डरकर बर्थ देने में उन्हें प्राथमिकता देने लगी है। तीसरे ने कहा कि रेलवे  अब नया प्रयोग कर रही है रेलवे में बढ़ती चूहों की संख्या को देखकर उन्होंने सांप की डयूटी लगा दी है। चौथे ने कहा -यार्ड में मेंटनेंस होने वाले कोचों की जांच में लापरवाही चल रही है ये जरूर मैकेनिकल विभाग की लापरवाही का नमूना है। एक पत्रकार ने सीधे रेल मंडल के सबसे बड़े साहब को फोन लगा दिया, पत्रकार ने कहा जिस रेलगाड़ी में जहरीला सांप 23 नंबर की बर्थ में बिना टिकट यात्रा कर रहा था,यह रेलगाड़ी आपके रेलमंडल से चालू होती है और आपके यार्ड के मेंटनेंस विभाग ने कोच में जहरीले सांप को सवार करके मुंबई भेजने में सहायता की है,इस मामले में आपका क्या कहना है ? पत्रकार की बात सुनकर पहले तो साहब ने इंकार किया कि सांप कोच में था ही नहीं... फिर जब उनको वाइरल हुआ वीडियो भेजा गया तो कहने लगे कि सांप दूसरे मंडल के स्टेशन से कोच में चढ़ा होगा, हमारे यहां के प्लेटफार्म से गाड़ी 14 घंटे पहले रवाना हुई थी यदि सांप हमारे मंडल से चढ़ा होता तो अभी तक तो 14 यात्रियों को काट चुका होता। पत्रकार बोला -  साहब आप रेलमंडल के सबसे बड़े साहब हो थोड़ा जिम्मेदारी से बयान दो,आप ही बताइए कि जिस ट्रेन में यात्री ही बमुश्किल से कोच की सीढ़ियां चढ़कर, दरवाजे खोलकर सीट पर बैठ पाते हैं ,

वहां सांप सांप प्लेटफार्म से ट्रेन में चढ़ा और आसानी से अपर बर्थ में जा बैठा, ये हैरानी वाली बात नहीं है क्या ?

पर आप कुछ मानने तैयार नहीं हैं और ऊपर से ये कह रहे हैं कि जब यात्री ने सांप को ट्रेन की सीढ़ी पर चढ़ते देखा तो सांप को रोका क्यों नहीं..... आप ठीक से जबाब नहीं दे पा रहे हैं इसीलिए हमें आपके मंत्री जी से सही जानकारी लेनी होगी, उन्होंने फोन काट दिया।

मंत्री जी को फोन लगाया गया उन्होंने कहा कि ऐसा कुछ पता तो चला है पर आप बताएं कि राष्ट्रीय एकता की प्रतीक हमारी रेलगाड़ी में  सांप यात्रा नहीं कर सकता क्या ? पत्रकार ने कहा - मंत्री जी आपकी रेलगाड़ी है आप कुछ भी कर सकते हैं, किसी को भी यात्रा करा सकते हैं, आमने-सामने से दो ट्रेनों की टक्कर कराके नये नये तमाशे करा सकते हैं,पर गरीब रथ के सांप प्रकरण पर तो थोड़ा सा बता सकते हैं न ?

मंत्री - देखिए, हमने जांच के आदेश दे दिए हैं, जहां तक सांप की बात है उसे हमारे विभाग के लोग पकड़ नहीं पाए और सीधी सी बात है वे पकड़ ही नहीं पाएंगे क्योंकि उस कोच में तैनात टीटीई ने बताया है कि जब वे उस कोच में टिकट चेकिंग के लिए घुसे और 23 नंबर पर सोये हुए यात्री को जगाकर टिकट की मांग की तो उस 23 नंबर की बर्थ पर एक जहरीला सांप फन काढ़ कर खड़ा हो गया, जिससे टीटीई डरकर भाग गए और सदमे आकर दूसरे कोच में जाकर छुप गए, किसी को कुछ बताया नहीं क्योंकि इस विकास के युग में ऐसी बात बताने से सब उसे पागल घोषित कर देते ...पर पत्रकार जी ये भी तो सोचिए कि सांप ने किसी को डराया नहीं, किसी को काटा नहीं,रात भर सब यात्रियों को बढ़िया सोने दिया। सांप अब समझदार हो गए उनका पूरा विष तो मंत्री और नेताओं के पास आ गया है।जब कुछ हुआ ही नहीं तो काहे का बखेड़ा खड़ा किया जा रहा है, विपक्ष वाले तो ये भी कह रहे हैं कि गरीब रथ वालों ने ध्यान नहीं दिया, 23 नंबर बर्थ में कोई भटकती आत्मा बिना टिकट सवार हो गईं थी, सही ढंग से टीटीई ने बेटिकट यात्रियों की जांच नहीं की, और वे लोग ये भी कह रहे हैं कि रेलवे यात्रियों को तो बर्थ देती नहीं है और सांप को बिना टिकट बर्थ देकर शान से मुंबई पहुंचाती है, रेलवे में सुरक्षा वगैरह से कोई मतलब नहीं है। अभी बिलासपुर लाइन में 150- 200 तोते बिना टिकट यात्रा करते पकड़े गए थे,उनका क्या हुआ अभी तक कुछ पता नहीं है। अभी दयोदय एक्सप्रेस के एसी कोच में सांप के आराम करने की खबर मिली है कहीं विपक्षी नेता सांप बनकर हमारी रेलगाड़ी में बेटिकट यात्रा तो नहीं कर रहे हैं।खैर, पत्रकार जी आप परेशान नहीं हों, हमने जांच कमीशन बैठा दिया है एक -दो साल में जब रिपोर्ट आएगी तो आपको पत्रकार वार्ता में जरूर बुलाया जाएगा और पर्याप्त आवभगत करके बड़ी गिफ्ट के साथ बिदा किया जाएगा......

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जय प्रकाश पाण्डेय, जबलपुर

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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