काव्य :
भगवद् गीता-दसवाॅ अध्याय
भगवान अर्थात् भाग्य को धारण
करनेवाला ,पराशर मुनि ने
भगवान के छः एश्वर्य बतलाए है-
ऐश्वर्य,वीर,यश,श्रेया,ज्ञान,वैराग्य
कृष्ण छह गुणों को धारण किए हैं,
इसलिए भगवान कहलाये हैं।
प्रभाव कारण को नहीं समझ सकता ,
बालक माता के बिना पिता को
नहीं जान पाता ,व्यक्ति गुरू-गीता
के बिना प्रभु का ज्ञान नहीं पाता
ज्ञान के अभाव में स्थिति परिस्थिति
के अनुसार श्रध्दा बदलती रहती है।
ज्ञान सभी के लिए आवश्यक ,
जो प्रभु की भक्ति करते हैं,
प्रभु उनकी हर चिंता हर लेते ,
ज्ञानरूपी दीपक से अज्ञानता
के अंधकार को दूर कर देते ,
अर्जुन की प्रार्थना पर अपने
बयासी एश्वर्य की चर्चा करते,
जीवो के सारे गुण मुझसे ही उत्पन्न
अजन्मा ,अनादि ,समस्त लोको का
स्वामी ,सारे एश्वर्य कृष्ण की
शक्ति के सूक्ष्म उदाहरण,
सारी विभूतियां कृष्ण के कारण,
तुच्छ एश्वर्य को छोड़कर,
प्रभुप्रेम मे जीवन बिताए,
भगवान अपने भक्तों को समय
आने पर ही संपूर्ण ज्ञान देते हैं ।
रणक्षेत्र मे जैसे अर्जुन को।
ऊँगली थामकर लक्ष्य तक ले जाते
भक्त और भगवान का संबंध पिता
पुत्र सा,प्रेम ,सुरक्षा और संरक्षण का
ऐसे गुजरता जीवन कृष्ण भक्तों का।
- रानी पांडेय , रायगढ़ छत्तीसगढ ।

