काव्य :
कर दोगे क्या
मुझे ख्यात कर दोगे क्या ।
खुराफात कर दोगे क्या ।
बारिश थोड़ा जमते ही।
उल्का पात कर दोगे क्या।
बात-बात में बात बना।
नई बात कर दोगे क्या।
नहीं कमी है भेदों की ।
कई जात कर दोगे क्या।
गिरे दिखेंगे धरती पर।
पीत पात कर दोगे क्या।
जीत तुम्हारे हिस्से में।
मुझे मात कर दोगे क्या।
- आर एस माथुर ,इंदौर
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