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काव्य : शरद चंद्र - अंजनी कुमार'सुधाकर' , बिलासपुर


 काव्य : 

शरद चंद्र

चंद्रमा उगते पूर्णिमा निशा में 

सोलह कलाओं से हो आवृत्त;

आश्विन मास की रात्रि पूर्णिमा 

चंद्र करें मान‌स को प्रभावित।


पूर्णिम अंबर तले रात जागरण 

कोजागिरी नृत्य गोपियां करतीं‌;

पनघट पर पनभरनियां हैं जातीं

रजत गागर अमृत छक भरतीं।


कोजागिरी की रजत निशा में 

सोलह कलाओं से चंद्र युक्त हैं;

महा रास करें निधिवन,बरसाने 

कृष्ण-सखी नृत्य रत उन्मुक्त हैं।


पूर्णिम चंद्र किरण औषधि है‌

कर लो चंद्र दर्शन बन चातक;

तपन तृषा विषाद मिट जायेंगे 

बैठ सुखासन करो तप त्राटक।


करो आराधना हरि-लक्ष्मी की 

करो आराधना शिवेंदु चन्द्र की;

करो आह्वान अश्वनी कुमार के 

करो आराधना पूर्णेंदु भद्र की।


जल हीम तत्व किरण रजत हैं 

धवल शुभ्र गुण दुग्ध में मिश्रित;

हविष्य अन्न चावल शर्करा संग

गुणकारी होता खीर परिष्कृत।


प्रकृति रुप औषधि बन जाता 

नीर क्षीर पय चंद्र आयुष रुप;

वातज कफ फुफ्फुस रोग में 

खीर उपचार चंद्राहुत अद्भुत।


मंत्र जाप करो एक माला भर 

'ओम् नमो नारायणणाय' की;

करो आराधना शरद चंद्र की 

श्रद्धान्वित हो पारायण की।


-अंजनी कुमार'सुधाकर' , बिलासपुर

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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