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काव्य : करवा चौथ - कवि छगनलाल मुथा-सान्डेराव, मुम्बई


 काव्य :

करवा चौथ


ऐ चांँद नहीं देख मुझे तूँ, आज तुझे मैं देखने आई।

नजर नहीं लगाना मुझको, मैं कजरा लगाकर आई।

चुप नहीं जाना शर्माकर, दुल्हन सी सजकर मैं आई।

करवाचौथ का व्रत है मेरा,छननी से मुझे देना दिखाई।


सारे घर में दीप जलायें, जैसे आई मेरे घर में दिवाली।

कौन छुड़वाए व्रत मेरा,सीमा पर तैनात है मेरा माली।

एक फोटो खिंच भेज दे मेरी,हाथो में करवे की थाली।

मुझे भरोसा तुझ पर चंदा,तेरा वचन न जाए खाली।


आॅनलाइन ही आ जाओ,ओ मेरे वतन के रखवाले।

देख तुम्हे खोलूंँगी व्रत मै, तुम्हारे नाम से दो निवाले।

निर्जला व्रत  है मेरा माता, मेरे सुहाग की रक्षा करना।

करवा माता मुथा करे प्रार्थना, सबके दुखड़े तूँ हरना।

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 - कवि छगनलाल मुथा-सान्डेराव, मुम्बई

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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