केरवा जे फरेला घवध से* *छठ गीत कार्यक्रम* संपन्न
रांची । रविवार को झारखंड भोजपुरी विकास केंद्र, राँची द्वारा लोकआस्था का महापर्व छठ के अवसर पर ऑनलाइन छठ गीत कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता निरंजन प्रसाद श्रीवास्तव ने की। संचालन पूनम वर्मा ने किया। कार्यक्रम का शुभारम्भ नीता शेखर के सरस्वती वंदना से हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डाॅ० जंग बहादुर पाण्डेय जी उपस्थित सभी कवियों - कवयित्रों को बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं तथा छठ व्रत को स्वच्छता , सामूहिकता, एकता एवं लोक आस्था का पावन पर्व बतलाया। संस्था के सचिव बिनोद सिंह गहरवार ने उपस्थित सभी विद्वत जन का स्वागत किया। संस्था के अध्यक्ष निरंजन प्रसाद श्रीवास्तव ने छठ पर्व के उद्गम एवं इसके महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि छठ सूर्य षष्ठी व्रत सूर्योपासना का व्रत तो है ही, साथ ही इस सृष्टि की अधिष्ठात्री प्रकृति देवी के छठे सर्वोत्कृष्ट मातृ रूप की उपासना का भी।
कार्यक्रम में उपस्थित रचनाकारों ने एक से बढ़कर एक प्रस्तुति दी। अर्पणा सिंह ने 'चकुनी जे हथिया के दरदर अमरिया हे', सुनीता श्रीवास्तव ने 'साँझ भइल छठी रहब रउआ कँहवा', आरती श्रीवास्तव ने 'गरजी - गरजी देव बरिसे ले', रश्मि सिन्हा ने 'केलवा के पात पर उगेलन सुरुज मल झांके - झुंके', सीमा सिन्हा ने 'सोने के खड़ौवा पहिरे आदित', डॉ. उर्मिला सिन्हा ने 'केकरा घरे सोना के कटोरवा, केकरा घरे दूध', गीता चौबे गूँज ने 'भोरे पराते रथवा सजवले', पूनम वर्मा ने 'घर पछुअरवा सेनुरिया भइया हो', रीम्मी वर्मा ने 'चारो पहर मइया जल - सेविला', मीरा सिंह ने 'स्वर्ग से आवेली छठी मइया', वीणा पाण्डेय ने 'पनिया में खाड़ तिवइया', संगीता सहाय ने 'काँच ही बाँस के बहँगिया', बिन्दु प्रसाद रिद्धिमा ने 'पहिले - पहिले हम कइनी' सुना कर कार्यक्रम को भक्तिमय बना दिया। मौके पर कवि हिमकर श्याम ने अपनी रचना' छठ अनुपम त्योहार' पढ़ी। सरोज श्रीवास्तव, रंजना वर्मा , निवेदिता श्रीवास्तव, लक्ष्मी सिंह तथा जीत यादव ने भी अपनी-अपनी रचनाओं की प्रस्तुति दी। धन्यवाद ज्ञापन संस्था की उपाध्यक्ष गीता चौबे गूँज ने किया।

