काव्य :
धन त्रयोदशी
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करते पुरुषार्थ रख कामना
धन धान्य सुखान्वित होने;
वैभव विलास पाने आनंद
पुण्य से कलुष अघ धोने।
अमृत घट जीवन का हेतू
धनवंतरि की रजत मंजुषा;
कौबेर स्वर्ण खजाना पाने
जीवन दीप्त ऊषा प्रत्युषा।
सागर मंथन था देवासुर का
धन धान्य सुख अमृत पाने;
कामधेनु कल्पद्रुम इच्छावी
श्री शक्ति से समादृत कराने।
मृत्यु भय रहित लास्य की
भौतिक सुख चाह अनन्त;
करने तरण मानसरोवर में
करता यत्न जीवन पर्यंत।
दीप जले दक्षिणावर्त एक
यम त्रयोदशी दिन आंगन;
धन तेरस शुभ मंगल होगा
सुरक्षित होगा गृह प्रांगण।
धनतेरस की बधाई!
शुभकामनाएं!
🪷💫🪔
-अंजनी कुमार'सुधाकर' ,बिलासपुर
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