सदा प्रीत तुमको निभानी पड़ेगी। वफा यार के प्रति दिखानी पड़ेगी। बनेगा फसाना अमर यह तुम्हारा, मगर यार कीमत चुकानी पड़ेगी। मिलेंगी दुआएं बड़ी रोज तुमको, तुम्हे बस हिकारत मिटानी पड़ेगी। बढ़ेंगी तुम्हारी तब घोर मुश्किल, तुम्हे जब सदाकत बतानी पड़ेगी। मगर खूब होगी प्रशंसा तुम्हारी। तुम्हे बस अदावत भुलानी पड़ेगी।
बढ़ेगी तुम्हारी धवल कीर्ति चहुँदिश, तुम्हे बस शराफत जगानी पड़ेगी।
मिला कब किसी को बिना मोल के कुछ, प्रथम तो जलालत उठानी पड़ेगी। अगर सीखना है हुनर कोई आला, जवानी उसी में खपानी पड़ेगी। बनेगा उजाला खुशी दौर 'दीपक',
तुम्हे ज्योति उसकी जलानी पड़ेगी।
- रजनीश मिश्र 'दीपक' खुटार शाहजहांपुर उप्र

