काव्य :
एकांत
जीवन के आपाधापी मे
जब भी "एकांत " का आप
अभिनंदन करते है,
उसी क्षण एक सेतु का
निमार्ण आरंभ होता है
परमात्मा और आत्मा का।
प्रतीक्षा नही,निर्माण कीजिए
कर्मो के यज्ञ मे ,वासनाओं कीआहूति
अमर आजाद आनंद का संचय ये,
जिन मूलभूत गुणो मे मनुष्य
अन्य जीवो से भिन्न है,
उनके उपयोग का आधार
है "एकांत "।
जीवन के सभी प्रपंचो का
"श्मशान" है एकांत ।
वाराणासी के गंगातट पर,
पूर्ण चन्द्ररात्रि मे माँ गंगा के
आँचल पर चांद के प्रतिबिम्ब
की धवल ऊर्जा के"औरा" मे,
नौकाविहार है एकांत ।
जीवन की उलझनो को
नये दृष्टिकोण से देखने
का एक जरिया है एकांत।
सारे शोर शांत हो जाते,
सिर्फ अन्तर्मन को सुनते
ईश्वर से जुड़ाव का,पूर्णता
के भाव का जरिया है "एकांत"
अनवरत परिपक्वता का प्रयास ,
नये आनंद का आगाज करे।
- रानी पांडेय,
रायगढ़, छत्तीसगढ।
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