काव्य :
मौन प्रार्थनाएं
ईश्वर हृदय में बसे,मुखड़ों पर है नूर।
प्रार्थनाएं निष्काम ही होती हैं मंजूर।
निर्मल मन की याचना,प्रभु करो स्वीकार।
बेड़ी डांवाडोल है,प्रभु थामो पतवार।
नहीं किसी से बैर है, नहीं किसी से रोष ।
यही हमारी प्रार्थना, तजो हमारे दोष।
कच्ची पक्की उम्र भी,हो जाती इक सम।
जब साधना ध्यान से,मिटते अंतस तम।
प्रार्थनाएं मौन हैं, पर प्रभु नहीं अनजान।
कठिन समस्याओं को वही,करते हैं आसान।
आरंभ से अंत तक , रहे भीतर तेरी याद।
अंतस ज्योति ना बुझे,बस इतनी फ़रियाद।
- चरणजीत सिंह कुकरेजा ,भोपाल
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