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भारतीय स्टेट बैंक साहित्यकार मित्र मंडल का विमोचन कार्यक्रम एवं काव्य गोष्ठी संपन्न


 

भारतीय स्टेट बैंक साहित्यकार मित्र मंडल का विमोचन कार्यक्रम एवं काव्य गोष्ठी संपन्न

समाज को अधिक सभ्य और सुसंस्कृत बनाता है साहित् -   गोकुल सोनी

मन को गहरे तक छूती हैं श्री संजय कुमार सरस की कथाएं -  रामराव बामनकर

भोपाल । दुष्यंत कुमार संग्रहालय एवं पांडुलिपि न्यास में "भारतीय स्टेट बैंक साहित्यकार मित्र मंडल, भोपाल" द्वारा पुस्तक विमोचन कार्यक्रम एवं सरस काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गए जिसमें भारतीय स्टेट बैंक स्टाफ लर्निंग सेंटर से निवृत्तमान निदेशक एवं साहित्यकार श्री संजय कुमार सरस को भावभीनी विदाई दी गई।

     कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार गोकुल सोनी ने की। मुख्य अतिथि डा. संजय सक्सेना साहित्यकार (सह सचिव हिंदी भवन), सारस्वत अतिथि श्री रामराव वामनकर, संयोजक  श्री मनोज गुप्त मनोज, एवं उत्सव मूर्ति श्री संजय सरस भी मंचासीन रहे। कार्यक्रम का सरस एवं सफल संचालन वरिष्ठ साहित्यकार श्री सुरेश पटवा ने किया। 

    मां सरस्वती को माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि पश्चात दुष्यंत संग्रहालय की प्रबंधक श्रीमती करुणा राजुरकर ने स्वागत भाषण दिया। तत्पश्चात विदा ले रहे श्री सरस जी का शाल श्रीफल से विशेष सम्मान किया गया।

 श्री संजय सरस की पुस्तक "चौखट से चौराहे तक" का, श्री गोकुल सोनी के काव्य संग्रह "सुनो सूरजमुखी" का, एवं श्री सुरेश पटवा की पुस्तक "संवेदना" के लोकार्पण पश्चात काव्यगोष्ठी में सर्व श्री दीपक पंडित, रमेश श्रीवास्तव नंद, पुरुषोत्तम तिवारी साहित्यार्थी,  राजेंद्र गट्टानी, मनीष श्रीवास्तव बादल, चंदर सिंह पवार, राममोहन चौकसे, बिहारी लाल सोनी अनुज, एस डी श्रीवास्तव, सतीश श्रीवास्तव, दिनेश गुप्ता मकरंद, सुरेश पटवा, संजय सरस, ने सरस रचनाएं प्रस्तुत की। डा संजय सक्सेना ने सरस प्रेमगीत प्रस्तुत किया तथा मनोज गुप्त मनोज ने सुंदर हास्य व्यंग्य की रचना प्रस्तुत की। 

     सर्व श्री भरत केशवानी, राजेश गर्ग, अरुण गुप्ता, श्रीमती ममता श्रीवास्तव, ने भी उद्बोधन दिए।

     अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में श्री गोकुल सोनी ने कहा कि साहित्यकारों ने अपने सृजन से समाज को सार्थक दिशा देकर, इस दुनिया को अधिक सभ्य और सुसंस्कृत बनाकर जीने के योग्य बनाया है। हमारी नैतिक दायित्व है कि हम जो कुछ भी लिखें जिम्मेदारी के साथ लिखें। उन्होंने एक आशावादी कविता के साथ गीत "कितना भूलूं याद तुम्हारी, आ ही जाती है। सुनाकर वातावरण में सरसता घोल दी। उन्होंने संजय सरस के रचनाधर्म एवं स्वभाव की प्रशंसा करते हुए कहा कि भोपाल का साहित्यकार जगत आपको सदैव याद रखेगा।

अंत में कार्यक्रम के संयोजक श्री मनोज गुप्त मनोज ने सभी का आभार व्यक्त किया। 

गोकुल सोनी

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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