नारियां अपने आत्म गौरव के लिए संघर्ष करें
- राजेन्द्र शर्मा राही ,भोपाल
हमारी हिन्दू सांस्कृतिक सभ्यता वैदिक काल से काफी समृद्ध रही है जिसका इतिहास अनेक महानताओं से भरा पड़ा है जिसकी गौरव गाथाओं को लिख लिखकर ना तो हमारे हाथ आज तक थके और नाहि जिसकी महिमा गा गाकर हमारा कंठ आज तक थका यही कारण है कि अखिल विश्व हमारे सांस्कृतिक मूल्यों परंपराओं को सम्मान की दृष्टि से देखता है और अधिकांश देश इसे जानने समझने अपनाने के लिए लालायित बने रहते हैं इतिहास गवाह हैं कि नारी का जब जब जिस युग में किसी ने अपमान करने की कोशिश की है भगवान नारायण ने स्वयं अवतरित होकर उसे उसके कर्मों का दंड दिया है माता सीता का अपहरण ,द्रोपदी का अपमान जिसने भी किया उसका पूरा साम्राज्य ही समाप्त हो गया ।लेकिन अपमान नहीं सहा
यह हमारी भारतीय संस्कृति की महानता का ही परिणाम है कि हमारे यहां नारियों को पूजनीय स्थान प्राप्त है जिसको निम्न मंत्र में परिभाषित किया गया है
*यत्र नार्यस्तु पूज्यंते रमंते तत्र देवता*
नवरात्रि पर्वों के समय माता दुर्गा के नव रुपों की पूजा की जाती है लोग व्रत रखते हैं और श्रद्धाभाव से जगह जगह आकर्षक झांकियां लगाई जाती हैं उन पंडालों में नियमित पूजा आरती का आयोजन भी होता है तथा समाप्ति के बाद विसर्जन एवं कन्या भोज के बाद सभी को भंडारे में भोजन प्रसादी कराया जाता है पूरे देश में माता के भजनों के साथ एक उत्सव का वातावरण रहता है जो नारी के प्रति सम्मान भाव को प्रकट करता है
हिन्दू पूजन पद्धति में ऐसा कोई भी पूजन नहीं है जो माता दुर्गा गौरी के बिना संपन्न होता हो ।जहां एक ओर हमारी संस्कृति में इतनी महानताएं भरी पड़ी है नारी का सम्मान है वहीं दूसरी ओर हमारी आज की युवा पीढ़ी पाश्चात्य सभ्यता को तेजी से अपनाने में लगी है तथा अनेक वैश्विक प्लेटफार्म इसे परोसने में लगे हैं
इन सब कारणों से वर्तमान परिदृश्य में हमारी सांस्कृतिक सभ्यताएं विकृति के दौर से गुजर रही हैं जिन मानवीय मूल्यों के लिए कल तक हम गर्व करते थे वे आज हमारे बीच से अपना स्थान खो रहे हैं पाश्चात्य सभ्यता का सांस्कृतिक प्रदूषण इंटरनेट की कुछ वेबसाइटों,वैश्विक तर्ज पर बन रही फिल्मों,विज्ञापनों धारावाहिकों कामोत्तेजना भरे गानों नृत्यों के जरिए नव तकनीकों के माध्यम से तेजी से जन जन तक पहुंच रहा है आज जहां इन नव तकनीकों के सद उपयोग से नए रोजगार सृजित हुए हैं जीवन सुगम आकर्षक हुआ है कार्यालयों के कार्यों समीक्षाओं में सुगमता बढ़ी है जन जन का जीवन स्तर ऊंचा उठा है लेकिन इसी अनुपात में वस्तु बेचने के लिए कम समय में ज्यादा से ज्यादा लाभ कमाने की मंशा रखने वाले कुछ विकृत मानसिकता के व्यवसायियों ने इन तकनीकों का दुरपयोग कर सभ्य वातावरण को निंदनीय आपराधिक एवं कलुषित करने में हैं आजकल वैश्विक मंचों पर लड़की को फिल्मों में आइटम गर्ल, ड्रीम गर्ल, सेक्सी गर्ल,के रूप में संबोधन तथा नारी को एक भोगविलास की वस्तु के रूप में प्रस्तुत करने की व्यवसायियों में होड़ सी लग गई है ईश्वर प्रदत्त नारी के शरीर के हरेक अंग का वैश्विक गानों नृत्यों अभिनयों के माध्यम से मजाक उड़ाया जाना अनैतिक रिश्तों की कहानी बेचना,भाई बहन की जगह दोस्त यारी का रिश्ता लिव इन रिलेशनशिप का रिश्ता बेचना उसे व्यवहार का हिस्सा बनाने के लिए मीडिया एवं राजनेताओं को चुप करना निंदित स्वरूप में प्रस्तुत करना उसे मनोरंजन बतलाना बेहद शर्मनाक एवम निंदनीय है इन सब कारणों से नारी के प्रति देखने का दृष्टिकोण बदला है तथा सम्मानजनक भाव में कमी आई है आज वैश्विक फायदे के हमारे नौनिहालों को इस कदर दिग्भ्रमित किया जा रहा है कि वे अपराध बोध की भावना से ग्रसित होकर आपराधिक प्रवृत्ति की ओर बढ़ रहे हैं कल तक किशोर अवस्था के बच्चे अपराध में लिप्त नहीं थे लेकिन आज वे भी सबसे ज्यादा पाए जा रहे हैं जिस देश के घर गली मोहल्ले चौराहे पर देवालय प्रतिष्ठित हो, हजारों संस्कृति के संस्थान हों ,लाखों संत महात्मा धर्म प्रचारक हों, उस देश में वैश्विक कंपनी अनैतिक रिश्ते फिल्मों धारावाहिकों विज्ञापनों के माध्यम से बेच रही हैं तथा एक छल के तहत इसे भारतीय समाज की पसंद बताया जा रहा है अच्छे अच्छे संस्कारित प्रतिष्ठित घर भी इसके प्रभाव से अछूते नहीं रहे हैं फिल्मी स्टाइल में छेड़खानी बलात्कार,लूट हत्या से अखबारों के पन्ने भरे पड़े हैं लेकिन फिर भी इनसे पूछने ,इन पर कठोर कार्यवाही करने का साहस कोई नहीं जुटा पाता, मीडिया के जरिए ऐसे तथ्य जनता के सामने आने के बावजूद वे ही उन्हें भगवान की तरह परोसा जा रहा है इन्हें राजनेता पार्टियों का प्रचार करने के लिए उपयोग करते हैं उन्हें टिकट देकर संसद में प्रतिष्ठित करना तो आम बात हो गई है यह सब पैसे की ताकत से ही संभव हो पा रहा है
यह कैसी आजादी हमको एवं मीडिया को मिली कि हम मूल्य विहीन होते जा रहे हैं जिस महान संस्कृति के लिए देश जाना जाता है वह स्वयं कुंठित होकर हीन भावना से ग्रसित है आज की हमारी युवा पीढ़ी को मीडिया की मदद से वैश्विक ज्ञान दिन रात परोसा जा रहा है लेकिन मानवीय मूल्य संस्कृति की महानता से वंचित किया जा रहा है जो इसको अपनाता है उसे गंवार हतोत्साहित किया जाता है हिन्दुओं की संस्कृति को अपमानित करने के उद्देश्य से दिन रात गर्ल फ्रेंड बॉय फ्रेंड लिव इन रिलेशनशिप का प्रचार कर उसे हमारे व्यवहार का हिस्सा बना दिया आज इसके कारण अपराध की बाढ़ सी आ गई है लेकिन कार्यवाही करना तो दूर कोई इनसे पूछने तक का साहस नहीं जुटा पाता
आज इसी के कारण घर घर मानसिक रोगी बढ़ रहे हैं जगह जगह मेडीटेशन के कैंप शिविर लग रहे हैं जिनकी ओर जनता भाग रही हैं फिर भी समाधान नहीं मिल पा रहा है
आज आवश्यकता कि हम सभी इस विषय पर गंभीरता से चिंतन करें तथा अपराधिक पृष्ठ भूमि गढ़ने वाली विषाक्त वैश्विक सामग्री को अपनी पसंद का हिस्सा नहीं बनाएं तथा सकारात्मक दृष्टिकोण से व्यापार करने वालों को प्रोत्साहित करें जिससे एक स्वस्थ वातावरण का निर्माण हो सके हम भी अपनी पसंद को देश काल परिस्थिति के अनुरूप अपनाते हुए मर्यादित परिधानों तथा उनके प्रदर्शन में अपनी रुचि प्रदर्शित करेंगे तो व्यवसायियों का दृष्टिकोण बदलेगा और वे उसी अनुरूप परिधान बाजारों में लाएंगे जिन विज्ञापनों फिल्मों धारावाहिकों में नारी को अपमानित स्वरूप एवं अनैतिक रिश्तों के साथ परोसा जाता है उसको अपनी पसंद का हिस्सा न बनाते हुए बहिष्कार करें हमारा समाज बच्चे पहले से ज्यादा शिक्षित है तो हमारी पसंद गरिमामई होनी चाहिए लेकिन उसका फूहड़ होना भविष्य के लिए अच्छा संकेत नहीं है
वृक्ष जैसे जैसे बड़ा होता छाया फल देता है लेकिन हम उस सभ्यता का हिस्सा बन रहे हैं जो हमारे जीवन का कभी हिस्सा नहीं रही यदि जागरूकता बढ़ेगी दृष्टिकोण बदलेंगे तो सकारात्मक परिणाम आएंगे ही इसमें कोई संदेह नहीं
किसी ने सही कहा है
निगाहें बदल गई तो नज़ारे बदल गए
कश्ती ने बदला रुख तो किनारे बदल गए।
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