गजल लिखने के लिए गजल के व्याकरण और शिल्प को समझना जरूरी
इंदौर । शहर में दीपावली महापर्व के जाने के बाद कार्यक्रमों की बाढ़ सी आई हुई है । इसी तारतम्य में साहित्यिक कार्यक्रमों का सिलसिला भी पीछे नहीं है।इंदौर प्रेसक्लब में रविवार दिनांक 10 नवंबर को आनंदमोहन माथुर सभागृह में शायर श्री किशन शर्मा "कौशल" के ग़ज़ल संग्रह "सरोकार" का विमोचन एवं विमर्श का कार्यक्रम गज़लकार श्री चंद्रभान भारद्वाज की अध्यक्षता में तथा लब्धप्रतिष्ठित साहित्यकार श्री अश्विनीकुमार दुबे के मुख्य आतिथ्य में संपन्न हुआ। ग़ज़ल पर समीक्षात्मक टिप्पणी चर्चाकारों श्री आर एस माथुर तथा श्री प्रदीप कांत द्वारा की गई। श्री माथुर ने गजल को परिभाषित करते हुए गजाला शब्द से उसके उद्भव की व्याख्या की। वरिष्ठ कवि श्री प्रदीप कांत ने गजल के शिल्प पर बातचीत की। अध्यक्ष श्री चंद्रभान भारद्वाज ने गजल के व्याकरण पर चर्चा की तथा बहर में कैसे गजल लिखी जाती है उसके बारे में अपने विचार व्यक्त किए। लेखक किशन शर्मा कौशल ने अपने आत्मकथ्य में न सिर्फ कुछ गजलें सुनाई अपितु अपने जीवन को लेकर बहुत सारे संस्मरण भी सुनाएं।दो घंटे चले इस कार्यक्रम में संग्रह की ग़ज़लों पर तथा उसके सामाजिक, राजनीतिक, तथा व्यक्ति के रोजमर्रा के सरोकारों से संबंधित चर्चा हुई।ये कार्यक्रम शहर की साहित्यिक संस्था 'क्षितिज' के द्वारा किया गया। इस अवसर पर संस्था के अध्यक्ष श्री सतीश राठी ने अतिथियों के लिए स्वागत भाषण किया।
कार्यक्रम में शहर के प्रमुख साहित्यकारों में श्री पुरुषोत्तम दुबे, श्री सत्यनारायण व्यास(सूत्रधार), लघुकथाकार श्री राममूरत राही , कवि श्री प्रदीप नवीन, श्रीमती ज्योति जैन, रश्मि चौधरी, श्री अनिल ओझा, आशा वडनेरे,जयंत फडनिस, ओम प्रकाश बोहरा, विश्वबंधु नीमा तथा श्री शर्मा के मित्र, परिजन भी उपस्थित रहे। श्री सुरेश रायकवार ने संस्था की ओर से आभार माना।कार्यक्रम का सफल संचालन लेखिका श्रीमती प्रीति दुबे के द्वारा किया गया ।
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