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काव्य : ...तुम्हारे जाने के बाद - डॉ गिरिजेश सक्सेना, भोपाल


 काव्य : 

...तुम्हारे जाने के बाद


चेहरे तैरते विचरते मेरे आस-पास,

लगते निस्तेज निर्विकार निर्जीव‌से,

जैसे ढो रहे अपनी हि शव‌ा यात्रा,

उस दिन‌ से, तुम्हारे जाने कै बाद।।


सामीप्य तुम्हारा महसूस नहीं था उतना,

पल-पल हर-पल तो साथ नहीं होते थे,

हर चेहरे में लेकिन ढूंढ लेता हूं तुमको,

उस दिन से, तुम्हारे जाने के बाद।


उस दिन से कहां कहीं भी रहता हूं,

भरी भीड़ नितान्त अकेला होता हूं,

ऑखों मे दुनिया पलकों मे बस तुम 

उस दिन से, तुम्हारे जाने के बाद।


होता है पल पल हर पल एहसास,

यहीं कहीं हो ऑखों के आसपास,

रूह कांपा देता तेरे जाने का ख़याल,

उस दिन से, तुम्हारे जाने के बाद। 


तुम नहीं, क्यूं कैसे कर लूं विश्वास,

जब हर पल  रहती हो आस पास,

टूटे मन है, अथक दरस की आस,

उस दिन से, तुम्हारे जाने के बाद।


हॅसता हूॅ मैं लिये हॅसी खोखली सी,

मन पर अधेरों की बंधी पोटली सी,

एक घुटन अनवरत खोदती मुझे है,

उस दिन से, तुम्हारे जाने के बाद।


जानता हूं जो जाता है आता नहीं,

पर तुम्हरा जाना मन मानता नहीं,

बिखरा बिखरा सा सब समेटता हूं,

उस दिन से, तुम्हारे जाने के बाद।

- डॉ गिरिजेश सक्सेना, भोपाल

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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