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काव्य : न मिल पाया मीत - सीताराम साहू'निर्मल' छतरपुर


 काव्य : 

न मिल पाया मीत


न मिल पाया मीत रे, ,,,,मनुवा,,,न मिल पाया मीत।

अब कब होगी जीत रे मनुवा,अब कब होगी जीत।

माया द्वारा छला गया हूं,काया के संग चला गया हूं,

यह जीवन है कोरा सपना,कोई संग चले न अपना,

जीवन गया है बीत रे मनुवा,,,, जीवन गया है बीत।

अब कब होगी जीत रे मनुवा,अब कब होगी जीत।


ढूंढ रहें हैं सब साजन को,ढूंढ रहे हैं मनभावन को,

स्वर सरगम से गा गा हारे,गीतों में भी खूब पुकारे,

सब झूठा संगीत रे ,,,,,,मनुवा,,,,,,सब झूठा संगीत।

अब कब होगी जीत रे मनुवा अब कब होगी जीत।


जोगी वाला जीवन जी रे,राम नाम का तू रस पी रे,

विष प्याला अमृत होता है ,साधु जगते में सोता है,

समय न जाए रीत रे,,,,मनुवा,,, समय न जाए रीत।

अब कब होगी जीत रे मनुवा अब कब होगी जीत।


बुरे कर्म से नहीं लजाते, अंतिम में मानव पछताते,

निर्मल कर्म करे रघुराई,महिमा सद ,ग्रन्थों में गाई,

उत्तम रघुकुल रीति रे,,, मनुवा, उत्तम रघुकुल रीति।

अब कब होगी जीत रे मनुवा अब कब होगी जीत।


- सीताराम साहू'निर्मल' छतरपुर मप्र

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

1 Comments

  1. मन की लागी प्रीत रे मनवा मन की लागी प्रीत
    छूट गए सारे मीत रे मनवा छूट गए सारे मीत


    बहुत सुंदर काव्य रचना

    ReplyDelete
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