काव्य :
गुरु पर्व
आओ बच्चों, गुरु चरणों में शीष नवायें
साक्षात ईश्वर है, गुरु उनके ही गुण गाएं
प्रथम गुरु ,माता-पिता-भ्राता उनको पुष्प चढ़ाएं
अर्चन करें, सेवा करें वंदना शिक्षा प्रसाद पायें ।
सुमिरन से महर्षि वेदव्यास कै पाप सभी कट जाएं
आज है गुरु पर्व उनका जन्मदिन मनाएं ।
वेद और महाभारत के ज्ञाता की अलख जगाएं
सुमिरन करें सब गुरुओं का भवसागर पार हों जाए।
- राम वल्लभ गुप्त '"इंदौरी"
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