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कवि आनंद जैन "अकेला" का उदयपुर राजस्थान में सम्मान


कवि आनंद जैन "अकेला" का उदयपुर राजस्थान में सम्मान

उदयपुर । समरस संस्थान साहित्य सृजन भारत अहमदाबाद की उदयपुर इकाई के तत्वावधान में, श्रीमती डाॅ. कामिनी व्यास रावल जी ( राष्ट्रीय उपाध्यक्ष)के निवास स्थान पर, संस्थान के राष्ट्रीय महामंत्री कवि श्री आंनद जैन "अकेला" जी कटनी मध्यप्रदेश ,की अध्यक्षता में उदयपुर इकाई के पदाधिकारियों की उपस्थिति में, काव्य गोष्ठी की अध्यक्षीय आसंदी पर आसीन कराए गए "अकेला" जी का डॉ.  कामिनी व्यास  रावल जी ने तिलक वंदन करते हुए ,श्रीफल द्वारा स्वागत  किया।  श्री संजय गुप्ता देवेश जी ने राजस्थानी साफा पहनाकर सम्मानित  किया । वरिष्ठ  साहित्यकारा श्रीमती  आशा पाण्डेय ओझा जी ने तिलक लगाकर शाल ओढ़ाकर मान दिया। तत्पश्चात  डॉ नम्रता जैन जी ने उपरना पहनाया,स्वलपाहार के पश्चात काव्य सृजन की प्रस्तुतीकरण की बेला में ,कवि आनंद जैन अकेला जी ने मुक्तक पढ़ा ,

अब प्रेम  के प्याले में जहर पी रहा हूँ मैं ।

धारों पे नश्तरों के ,चल के जी रहा हूँ  मैं ।।

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सुना है पेड़ चंदन से,विषधर  ही लिपटता है ।

बशर जो भी मिला हमसे ,संदल सा महकता है ।।

एक  रचना तरन्नुम में यह भी पढ़ी

मस्जिद  से मंदिर  का यारो,निकल रहा कनेक्शन  है ।

भोले बाबा और  खुदा का ,बड़ा अजीब  सेलेक्शन है ।। अपने काव्य पाठ से सभी की दाद पाई।  श्री संजय गुप्ता जी ने चौपाई, सोरठा आदि छंद  के,तुलसीदास  जी महान विद्वान। सवैया छंद  अमर  कर  गए,  रस मे भर - भर भक्त रसखान ।। डाॅ.कामिनी व्यास रावल जी ने देश भक्ति का संदेश दिया इन पंक्तियों से यह वतन आन है बान है शान है इसलिए ये हमारी सदा  जान है , वरिष्ठ साहित्यकारा आशा पाण्डेय ओझा जी ने सामाजिक ताने बाने को परिलक्षित करती हुई  पंक्तियां पढ़ीं कि आ गया समय कैसा ।बाल पानी पी रही,खेत खाते धान अपना हर तरफ बस स्वार्थों का एक आदमखोर सपना ।। से अपने भाव प्रकट किए।  डाॅ.नम्रता जैन जी ने साहित्य साधना के प्रति अपने मनोभाव इन पंक्तियों में व्यक्त किए साहित्य  लेखन है साधना,करती  जीवन को परिष्कृत  , डॉ तन्मय पाठक भी कार्यक्रम का हिस्सा बने ।

सभी की सारगर्भित और अच्छी तरन्नुम में प्रस्तुत की गईं रचनाओं की सराहना की गई। 

इस प्रकार बहुत ही सौहार्दपूर्ण वातावरण के मध्य काव्य दिवस की सार्थकता दृष्टव्य  हुई  ,और पुनः इसी प्रकार काव्य साधना हेतु चर्चा के साथ यह सत्र समापन  हुआ।

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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