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शासकीय कन्या महाविद्यालय इटारसी में एबीसी आईडी एवं डिजिलॉकर पर हुआ राष्ट्रीय वेबीनार का आयोजन


 

शासकीय कन्या महाविद्यालय इटारसी में एबीसी आईडी एवं डिजिलॉकर पर हुआ राष्ट्रीय वेबीनार का आयोजन

देशभर से विद्वानों ने वेबीनार में भाग लिया

इटारसी। शासकीय कन्या महाविद्यालय इटारसी में *अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट : भारत में लचीली उच्च शिक्षा का एक नया युग*  विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय वेबिनार का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (RUSA) तथा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के निर्देशन में आयोजित किया गया। वेबीनार में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. कामिनी जैन प्राचार्य अग्रणी महाविद्यालय नर्मदा पुरम शामिल रही। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. आर. एस. मेहरा ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि इस प्रकार के वेबिनार विद्यार्थियों और शिक्षकों को डिजिटल साक्षरता की दिशा में अग्रसर करते हैं। शिक्षण संस्थानों को डिजिटल परिवर्तन में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। वेबीनार की आयोजक आईक्यूएसी प्रभारी डॉ. हरप्रीत रंधावा ने कहा कि एबीसी आईडी और डिजिलॉकर प्रणाली से शैक्षणिक दस्तावेज़ों की पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित होती है। यह प्रणाली छात्र-छात्राओं के लिए शिक्षा का एक नया डिजिटल आयाम प्रस्तुत करती है।कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रोफेसर आशुतोष कुमार (पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़) ने नई शिक्षा नीति 2020 के संदर्भ में कहा कि डिजिटल शिक्षा प्रणाली उच्च शिक्षा में लचीलापन, पारदर्शिता और सुगमता प्रदान करती है। एबीसी आईडी विद्यार्थियों के लिए आजीवन शैक्षणिक पहचान का कार्य करता है, जिससे उनका शैक्षणिक रिकॉर्ड सुरक्षित एवं सुलभ रहता है।श्री अभिनव शर्मा (ज़ोनल कोऑर्डिनेटर, डिजिलॉकर/एबीसी आईडी) ने कहा कि अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट उच्च शिक्षा संस्थानों में क्रेडिट ट्रांसफर की सुविधा देता है, जिससे विद्यार्थियों को अपने अध्ययन में अधिक स्वतंत्रता और विकल्प मिलते हैं। श्री अक्षय मंगवाने (स्टेट कोऑर्डिनेटर, डिजिलॉकर/एबीसी आईडी) ने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म शिक्षा के क्षेत्र में तकनीकी क्रांति ला रहे हैं, और विद्यार्थियों को इन सुविधाओं के उपयोग के प्रति जागरूक होना चाहिए। कार्यक्रम का संचालन डॉ. शिरीष कुमार परसाई ने किया। उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा कि नई शिक्षा नीति का उद्देश्य विद्यार्थियों को आजीवन सीखने के अवसर देना और शिक्षा को डिजिटली सशक्त बनाना है। कार्यक्रम के अंत में उन्होंने वोट ऑफ थैंक्स प्रस्तुत करते हुए सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं तकनीकी सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।वेबिनार में देशभर के विभिन्न महाविद्यालयों से प्राध्यापकों एवं विद्यार्थियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। कार्यक्रम को सफल बनाने में महाविद्यालय के सभी प्राध्यापको एवं तकनीकी टीम में शामिल श्री राजेश कुशवाहा, श्रीमती सरिता मेहरा, एवं श्री मंथन दुबे का विशेष योगदान रहा। कार्यक्रम का उद्देश्य डिजिटल शैक्षणिक प्रणालियों के प्रति जागरूकता बढ़ाना एवं उच्च शिक्षा में नवाचार को प्रोत्साहित करना था। वेबीनार में वैचारिक मंथन के दौरान प्राप्त सुझावों जैसे सरकार को एबीसी प्रणाली के प्रभावी कार्यान्वयन और प्रबंधन के लिए पर्याप्त संसाधन और तकनीकी सहायता प्रदान करना चाहिए, शिक्षकों और छात्र-छात्राओं  को एक नई प्रणाली के बारे में शिक्षित करने और उन्हें आवश्यक प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए एक व्यापक कार्यक्रम शुरू किया जाना चाहिए, एबीसी और लचीलेपन को बढ़ावा देने के लिए सभी उच्च शिक्षा संस्थानों में एक समान नीति और मानक लागू किया जाना चाहिए को सभी विद्वानों का समर्थन प्राप्त हुआ।

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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