काव्य :
उम्र अब ढलान पर है....
(1)
उम्र अब ढलान पर है...
फिर भी हजार शिकायतें जबान पर है..
गिले शिकवे करते करते...
सारी उम्र कट गई..
फिर भी गलतियां उफान पर है..
उम्र अब ढलान पर है...
फिर भी हजार शिकायतें जबान पर है...
(2)
तेरे सपने अब मेरे सपने हो चले..
तेरी यादें अब मेरी यादें हो चले..
फिर भी तेरी फब्तियां चालान पर है.
उम्र अब ढलान पर है...
फिर भी हजार शिकायतें जबान पर है..
(3)
इस उम्र में तन्हाई घेर लेती है..
जब लड़खड़ाती है आपकी ज़बान..
चेहरा पढ़ लोग बात जान ही जाते है..
उम्र अब ढलान पर है...
फिर भी हजार शिकायतें जबान पर है..
- अजय कुमार यादव
ग्राम पोस्ट लटोरी
सूरजपुर छत्तीसगढ़
मोबाइल 9977373081
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काव्य
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