काव्य :
मकड़जाल
मकड़जाल होता जीवन,उलझा रहता सबका मन
मोह,प्रेम,ईर्ष्या तुलना,सब भटकाते जाते मन
प्राप्तियां,सफलताएं, हैं चूमती उच्च गगन
कभी निराश करती है जिंदगी,और है कभी पतन
खुशियां,दुःख सब है ,अंग जीवन के
इसमें मधु भी है,और है कड़वापन
हो सहज,*ब्रज* कर स्वीकार जिंदगी
मिलेंगे शरद,बसन्त और ग्रीष्म तपन
- डॉ ब्रजभूषण मिश्र , भोपाल
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