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डायबिटीज : रोग की बढ़ती समस्या और बिगड़ती जीवनशैली - शिक्षाविद डॉ बी आर नलवाया मंदसौर


 

विशेष ~14 नवंबर, विश्व मधुमेह  दिवस,( World diabetes day )

डायबिटीज : रोग की बढ़ती समस्या और बिगड़ती जीवनशैली


      -  शिक्षाविद डॉ बी आर नलवाया मंदसौर


प्रस्तुति डॉ घनश्याम बटवाल

        डायबिटीज (मधुमेह) की समस्या भारत समेत पूरे विश्व में तेजी से बढ़ रही है। यह हर आयु वर्ग के महिलाओं युवाओं पुरुषों के साथ अब कम उम्र किशोर व बच्चों में भी देखा जा रहा है यह देश के स्वास्थ्य के लिए अच्छा संकेत नहीं है । मधुमेह के चलते हमें कई स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। डायबिटीज पहले  अमूमन अधेड़ उम्र के लोगों में होती थी। अब यह बच्चों : युवकों को भी  शिकंजे में ले रही है। भारत में लगभग 10 करोड़‌ से अधिक लोगों को डायबिटीज है। वहीं विश्व में 44 करोड़ लोग इससे पीड़ित है। भारत में डायबिटीज की प्रचलित दर 11.5 प्रतिशत है, जबकि प्री डायबिटीज के मामलों की दर 15.3 प्रतिशत  तक पहुँच गई है , यानी देश का हर 10 मे से एक व्यक्ति इस बीमारी से प्रभावित है । एक अनुमान के अनुसार 85 करोड़ लोग दुनिया भर में डायबिटीज के मरीज 2050 तक हो जाएंगे।

डायबिटीज में आपका शरीर पर्याप्त या बिलकुल भी इंसुलिन का उत्पादित नहीं कर पा रहा है या फिर उत्पादित इंसुलिन की सही तरीके से शरीर में उपयोग नहीं हो पा रहा है।     

 डायबिटीज होने के तीन कारण- पहला अनुवांशिक, दूसरा शारीरिक मेहनत की कमी और तीसरा मोटापा । डायबिटीज के लगभग 60 प्रतिशत पीड़ित व्यक्तियों में इसके लक्षण दिखाई ही नहीं पढ़ते है। ऐसे में इसकी पहचान दो तरह से होती है। पहला लक्षणों के आधार पर और दूसरा रक्त की जांच से। ब्लड टेस्ट में यदि खाली पेट शुगर 126 से अधिक और भोजन के दो घण्टे के बाद 200 से अधिक है तो व्यक्ति डायबिटिक है। एचबीएवनसी 6.5 से अधिक है तो इसका अर्थ भी यह है--- परीक्षण-व्यक्ति में ?डायबिटीज है। डायबिटीज का शरीर प्रवेश को यूँ समझे यदि व्यक्ति के जीवन में अनियमित जीवनशैली, अस्वास्थ्यकर आहार,मोटापा और आनुवंशिक प्रकृति रही है। इसके बचाव के लिए संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, वजन पर नियंत्रण, और तनाव प्रबंधन महत्वपूर्ण है।विश्व स्तर पर बढ़‌ती इस गंभीर और क्रोनिक  बीमारी के बारे में लोगों को जागरूक करने, इससे बचाव को लेकर लोगों को शिक्षित करने के उद्देश्य से हर वर्ष 14 नवंबर को विश्व डायबिटीज डे मनाया जाता है।    

सर्दी के मौसम में डायबिटीज मरीजों को अधिक सजग रहना होगा। तापमान में गिरावट के साथ प्रदूषण, अस्थमा, फेंफड़ों व एलर्जी से ग्रसित रोगियों के लिए घातक हो सकता है। इस मौसम में वातावरण में घूले सूक्ष्म कण महत्वपूर्ण अंगों  पेनक्रियाज, फेफड़े व आखों को नुकसान पहुंचाकर रोग की जटिलता को बढ़ा देते है। ऐसे में डायबिटीक को खासी, जुकाम, सांस फूलने जैसी समस्या का इजाफा हो जाता है।

डायबिटीज से पहले प्री-डायबिटीज स्टेज होता है। यहाँ शुगर का स्तर नियंत्रण में होती है। इस स्टेज पर अगर थोड़ी सावधानी बढ़ा दे तो इससे बचना कठिन नहीं है। इस स्तर पर भविष्य में डायबिटीज के शिकार हो सकते है। अतः इस स्तर  डाक्टर से  संपर्क  करले तो उस स्तर पर इसे रोका जा सकता है। टाइप-2 डायबिटीज में दुनियाभर में सबसे ज्यादा मरीज होते हैं। विशेषज्ञ बताते है कि 2045 तक देश में-12.49 करोड़ लोग टाइप 2  के डायबिटीक होने की संभावना है। 

भारत में बढ़ते मधुमेह रोगियों के चलते देश को मधुमेह की राजधानी भी कहा जाने लगा है ।

टाइप-2 में शरीर इंसुलिन का सही उपयोग नहीं कर पाता है। ऐसी स्थिति में ब्लड ग्लूकोज की जाँच को नियमित कर के अनियमितता होने पर डाक्टर से सम्पर्क अनिवार्य रूप से करें। यह रोग शरीर में दीपक की तरह काम करता है और उसे अंदर से खोखला करता रहता है। इसकी वजह से आँखो में रेटिना की नाजुक रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचता है, किडनी की गड़बडी, हृदय रोग आदि बीमारियाँ हो जाती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते है ये बीमारियाँ स्वास्थ्य क्षेत्र पर दबाव बढ़ाती जा रही है साथ कई अन्य बीमारियों का कारण भी बनती है। इस‌लिए इससे बचे रहने के लिए निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए।

डायबिटीज से बचने के लिए तथा आहार में भोजन में 50 प्रतिशत सब्जिया-25 प्रतिशत साबूत अनाज, 25 प्रतिशत प्रोटीन, भोजन के बाद 10 मिनट वॉक, सुबह उठने के बाद नित्यकर्म पश्चात नाश्ता करें इससे मेटाबालिज्म सुधरेगा व ऊर्जा स्तर बढ़ेगी, थोडे-थोड़े समय पर कुछ खाते रहे, सप्ताह में कम से कम 4 दिन 40 मिनट व्यायाम, सात से आठ घंटे नींद का नियम बने, रोज 30 ग्राम फाईबर से कोलेस्ट्राल और वसा को शरीर से बाहर करता, आदि । डायबिटीज को यदि पहले साल से ही नियंत्रित कर लिया जाए, तो शरीर को इससे निपटने में बेहद आसानी होती हैं। अब यह है कि शुगर की जाँच, हृदय, किडनी की नियमित जांच और योग, व्यायाम ध्यान से डायबिटीज पर नियंत्रण संभव है। विश्व मधुमेह दिवस पर केवल सामान्य जानकारी से अवगत किया है। विशेष रूप से चिकित्सा के लिए डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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