काव्य :
अपराध के दलदल में बेटियाँ, पर
तीन सौतनें सात हैं बच्चे....
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इंजी. अरुण कुमार जैन
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बेटी को तुम मत भटकाओ, नारी का ना पतन कराओ, उसे पढ़ाओ और बढ़ाओ, मास्टर,डॉक्टर साथ बनाओ. पर जिहाद की तालीम देकर, हत्यारिन तो ना बनवाओ. बेटी को तुम.....
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डॉक्टर बनती,नाम कमाती, यश,वैभव सम्मान भी पाती, दौलत,शोहरत,शांति मिलती, सौभाग्यवती वह बेटी बनती, लव जिहाद हथियार बनाकर उसे नर्क में मत भिजवाओ.
बेटी को तुम....
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लड़की, लड़की को बहकाये, झूठी बातों में फुसलाये,
दरिंदगी में उसे फंसाकार,
आत्महत्या को उकसाये,
मात, पिता बेबस मर जाएं,
ऐसा न दुष्कृत्य कराओ.
बेटी को तुम...
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नूर ये घर का,इज्जत घर की,
दो कुल को यह रोशन करती
सुरभित बगिया को बनने दो
इंद्रधनुष उसमें सजने दो,
आत्मघाती बम बनाकर,
जग को न शमशान बनाओ.
बेटी को तुम...
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उसने जो सपने देखे हैं,
सुरभित बगिया से सजने दो,
टुकड़े, टुकड़े करके उसके,
फ्रिज में कभी नहीं भरने दो,
जार जार जो रोयें परिजन,
ऐसा दुःख तो नहीं दिलाओ.
बेटी को तुम.....
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लव जिहाद में फंसी जो नारी
गाय मांस खाये बेचारी,
तीन सौतने,सात हैं बच्चे,
तिल तिल मरती जीवन सारी
जिसकीआह जला दे कुनबा
कुकृत्य ऐसे न करवाओ.
बेटी को तुम.....
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सेवा,करुणा, प्रेम धर्म है,
पीर मिटाना सही कर्म हैं, जड़चेतन सब प्रगति करें नित,सदचिंतन ही सही धर्म है, हत्या,लूट,बलात्कार को,
धर्म बता न पाप कमाओ.
बेटी को तुम....
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सूरज,चंदा देते नित हैं,
नदिया, झरने ही अमृत हैं,
पेड़, खेत हैं हमें पालते,
धरा,गगन, सागर संभालते,
बिन मांगे देने वालों में,
नाम लिखाकर आदर पाओ.
बेटी को तुम.....
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जो जिहाद को धर्म बताता,
लूट, डकैती सही ठहराता,
सारी दुनियाँ जुल्म कराकर,
त्राहि -त्राहि है मचवाता,
प्रभु, अल्ला न पैगम्बर वह,
नारपिशाच राक्षस कहलाता,
भंडाफोड़ करो उन सबका,
धरती से अस्तित्व मिटाओ.
बेटी को तुम....
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हर बेटी के मात पिता हैं,
भाई,बहिन,साथी,सखियाँ हैं
इन्हें रुलाया,पहुँचाया दुःख,
खून के आँसू रोओगे खुद.
किसी आँख में न हों आँसू,
ऐसा ही बस जतन कराओ.
बेटी को तुम...
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संपर्क//अमृता हॉस्पिटल, सेक्टर 88,फ़रीदाबाद, हरियाणा.
मो. 7999469175
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