काव्य :
शीतल मंद पवन सी (गीत)
तुम शीतल मंद पवन सी
जीवन में,मेरे मधुवन सी
पूजा के फूलों सी लगती
हो कुमकुम और चंदन सी
तुम शीतल मंद पवन सी
तुम दिखती,किसी सपन सी
बादल में बिजली किरण सी
दिखे चेहरे में, चमक तुम्हारी
ज्यों हो* परी किसी गगन की
तुम शीतल मंद पवन सी
माथे पे बिंदिया दमके
नयनो में कजरा चमके
कानों में झुमके शोभित,
तुम तस्वीर, किसी दर्पण की
तुम शीतल मंद पवन सी
मेरी यादों में तुम रहती हो
क्यों लगता कुछ कहती हो
वीणा के स्वर सब तुमसे
हो मेरे, चिंतन और मनन सी
तुम शीतल मंद पवन सी
रही निकट, कभी ना मेरे
क्यों लगता, मुझे तुम हो घेरे
जीवन है मेरा क्यों यूं
हूं सुनता तेरी, पायल खनखन सी
तुम शीतल मंद पवन सी
- डॉ ब्रजभूषण मिश्र , भोपाल
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