काव्य :
नजदीक करो
कुछ तो मुझको ठीक करो ।
थोड़ा सा नजदीक करो ।
दूरी बनी रहेगी जब ।
बीच दिलों के creek करो ।
मेरा दाम न देना तुम।
देखो मुझे न क्रीत करो ।
वैसे तो अच्छा ही हूं ।
थोड़ा फिर भी नीक करो ।
सर्दी गर्मी से बचना।
बार- बार क्यों छींक करो ।
दुनिया को मालुम होगा ।
अगर कहीं खुद लीक करो।
- आर एस माथुर , इंदौर
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