जब पाषाण को परमात्मा बना सकते हैं तो आत्मा को परमात्मा भी संस्कारों के द्वारा बनाया जा सकता है- मुनि सुव्रतसागर जी
श्रीमज्जिजिनेन्द्र पंचकल्याणक महा महोत्सव के शुभारम्भ पर निकली भव्य कलश यात्रा।
अयोध्या नगरी के पांडाल उद्घाटन एवं ध्ववजारोहण कार्यक्रम में उमड़े श्रद्धालु।
24 माताओं की गोद भरायी के साथ गर्भ कल्याणक के संस्कार मंगलवार को।
ललितपुर। बुंदेलखंड के प्रसिद्ध दिगंबर जैन सिद्ध क्षेत्र पावागिरि में मंगलवार को सुबह पं. विनोद कुमार जैन शास्त्री बबीना के निर्देशन में मूलनायक भगवान चमत्कारी बाबा पारसनाथ स्वामी का मस्तिकाभिषेक किया गया। श्रीमज्जिजिनेन्द्र जिनबिम्ब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा विश्व शांति महायज्ञ एवं नव गजरथ महा महोत्सव के शुभारम्भ में वात्सल्य मूर्ति बुंदेली संत मुनि सुव्रतसागर महाराज के मंगलमय सान्निध्य एवं प्रतिष्ठाचार्य बाल ब्रह्मचारी संजय भैया मुरैना, सह प्रतिष्ठाचार्य अमित जैन शास्त्री इंदौर के दिशा निर्देशन में देवाज्ञा गुरु आज्ञा आचार्य निमंत्रण जाप्यानुष्ठान के बाद ध्वजारोहण, दीप प्रज्वलन एवं मंगल कलश की स्थापना की गयी। तत्पश्चात भव्य कलश यात्रा निकाली गयी। जिसमें सबसे आगे मुनि श्री, डीजे की धार्मिक धुनों पर नृत्य करते युवा, सत्य-अहिंसा के नारे और जयकारे लगाते पुरुष, मंगल कलश लिए 24 अष्टकुमारी एवं महिलाएं, बग्गी में सवार माता-पिता, सौधर्म इंद्र एवं त्रय रथ में श्री जी को लेकर प्रमुख इंद्र-इन्द्राणी चल रहे थे। शोभा यात्रा पावागिरि मंदिर से अयोध्या नगरी पहुंची। जहाँ विधि विधान के साथ श्रावक श्रेष्ठी शशि जैन, खुशी-प्रीतेश कुमार रागनी-सौरभ पवैया परिवार ने ध्वजरोहण किया एवं सदर विधायक रामरतन कुशवाहा ने पांडाल उद्घाटन किया। तत्पश्चात मंडप उद्घाटन वेदिका शुद्धि सकलीकरण इंद्र प्रतिष्ठा एवं नान्दी विधान मंडप प्रतिष्ठा के बाद याग मंडल विधान का आयोजन किया गया। इस मौके पर 156 विधानों के रचयिता मुनि सुव्रतसागर महाराज ने कहा जहाँ 24 माता-पिता 24 सौधर्म इंद्र के साथ कुबेर इंद्र, महायज्ञ नायक सहित विभिन्न इंद्र-इन्द्राणी 400 से अधिक जिनबिम्बों के संस्कार कर पाषाण को परमात्मा बना सकते हैं तो आत्मा को परमात्मा भी संस्कारों के द्वारा बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कल 24 माताओं की गोद भरायी के साथ गर्भ कल्याणक के संस्कार का दर्शनीय अद्भुत दृश्य होगा। सायं काल महाआरती सुरेंद्र कुमार शाश्वत जैन पवा ने की। रात्रि में इंद्र दरबार तत्व चर्चा कुबेर द्वारा अयोध्या की रचना रत्न वृष्टि अष्टकुमारियों द्वारा माता की सेवा 16 स्वप्न दर्शन एवं गर्व कल्याणक की आंतरिक क्रियाओं का आयोजन किया गया। जिसमें डॉ. जयकुमार, राजकुमार जैन चकरपुर, अध्यक्ष ज्ञानचंद जैन बबीना, मंत्री जयकुमार जैन कन्धारी, कोषाध्यक्ष उत्तमचंद जैन बबीना, उपाध्यक्ष विशाल जैन पवा, धर्णेन्द्र जैन, अनंत कुमार, पुष्पेंद्र जैन, आशीष जैन, अरविन्द जैन, अचिन जैन, गौरव विरधा, सौरभ जैन, अक्षत पवा सहित क्षेत्र प्रबंध कार्यकारिणी समिति, निकटवर्ती एवं देश के कोने - कोने से पधारे सकल दिगम्बर जैन समाज का सक्रिय सहयोग रहा। संचालन अध्यक्ष ज्ञानचंद जैन बबीना एवं आभार व्यक्त उपाध्यक्ष विशाल जैन पवा ने किया।
.jpg)
