सिंधी समाज की कड़ी आपत्ति के बाद सन्नी लालवानी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज
इटारसी। प्रथम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अनीता खजूरिया के न्यायालय ने सिंधी समाज के पदाधिकारियों के साथ अभद्रता और धमकी देने के आरोपी सन्नी लालवानी का प्रथम अग्रिम जमानत आवेदन (प्रकरण क्रमांक बी.ए./23/2026) निरस्त कर दिया है। न्यायालय ने समाज की आपत्तियों और मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को राहत देने से इनकार कर दिया ।
सिंधी समाज ने दर्ज कराई आपत्तियां
पूज्य पंचायत सिंधी समाज इटारसी के पदाधिकारियों ने अधिवक्ता संतोष गुरयानी के माध्यम से न्यायालय में शपथ पत्र के साथ कड़ी आपत्ति दर्ज कराई।
पदाधिकारियों के साथ अभद्रता : आपत्तिकर्ता संजय मिहानी एवं पंचायत के संरक्षक व कार्यवाहक अध्यक्षों ने बताया कि आरोपी द्वारा सिंधी समाज के पदाधिकारियों के खिलाफ सोशल मीडिया पर अनुचित शब्दों का प्रयोग किया गया।
फोन पर अश्लील गालियां और धमकी : 13 जनवरी 2026 को आरोपी ने फोन पर अत्यंत गंदी गालियां दीं और जान से मारने की धमकी दी।
सोची-समझी साजिश का आरोप : समाज का तर्क था कि आरोपी शिक्षित है और उसे पता था कि ऐसे उत्तेजनापूर्ण व्यवहार से गंभीर विपरीत प्रभाव पड़ेगा ।
भ्रष्टाचार के झूठे आरोप : आरोपी ने पूर्व में सिंधी समाज की पंचायत में भ्रष्टाचार के संबंध में झूठी शिकायतें की गई थी।
न्यायालय की कार्यवाही और कानूनी आधार
आरोपी का नाम - सन्नी लालवानी
दर्ज अपराध - अपराध क्रमांक 31/26, धारा 105 बी.एन.एस.
बचाव पक्ष का तर्क - आरोपी को रंजिश के कारण झूठा फंसाया गया है और वह जांच में सहयोग हेतु तत्पर है ।
अभियोजन का रुख - एजीपी भूरेसिंह भदौरिया ने जमानत का कड़ा विरोध करते हुए इसे गंभीर प्रकृति का अपराध बताया। जिससे अग्रिम जमानत मिलने में सख्त बाधा आयी और आवेदन निरस्त हुआ।
न्यायालय का अंतिम निष्कर्ष
न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि आरोपी के विरुद्ध धारा 105 बीएनएस के तहत दर्ज मामला गंभीर है। न्यायालय ने निम्नलिखित बिंदुओं के आधार पर जमानत याचिका खारिज की।
अपूर्ण विवेचना : पुलिस द्वारा मामले की जांच अभी जारी है और विवेचना पूर्ण नहीं हुई है।
अपवादजनक स्थिति का अभाव : सर्वोच्च न्यायालय के न्यायदृष्टांतों के अनुसार, अग्रिम जमानत केवल अपवादजनक मामलों में दी जानी चाहिए, जबकि यहां ऐसी कोई स्थिति नहीं दिखी।
गंभीर आरोप : सिंधी समाज के पदाधिकारियों को दी गई धमकियों और साक्ष्यों के आलोक में आरोपी को मुक्त करना उचित नहीं पाया गया ।
पुलिस की आगामी कानूनी प्रक्रिया
अग्रिम जमानत याचिका निरस्त होने के बाद पुलिस अब निम्नलिखित कदम उठा सकती है-
गिरफ्तारी की कार्यवाही : अग्रिम सुरक्षा न मिलने के कारण अब पुलिस आरोपी सन्नी लालवानी को किसी भी समय गिरफ्तार कर सकती है।
न्यायिक रिमांड : गिरफ्तारी के बाद आरोपी को 24 घंटे के भीतर क्षेत्रीय मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया जाएगा, जहां पुलिस पूछताछ के लिए पुलिस रिमांड या जेल भेजने हेतु न्यायिक रिमांड की मांग कर सकती है।
साक्ष्यों का एकत्रीकरण : पुलिस फोन कॉल रिकॉर्डिंग, सोशल मीडिया मैसेज और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेज सकती है ताकि केस डायरी को और मजबूत किया जा सके।
फरारी की घोषणा : यदि आरोपी गिरफ्तारी से बचता है, तो पुलिस न्यायालय से धारा 82/83 के तहत उद्घोषणा और संपत्ति कुर्की की कार्यवाही शुरू कर सकती है।
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