काव्य :
नया जन्म
गर्भावस्था माँ बनने का
अनोखा सा चरण है ,
धैर्य, स्नेह का यह एक
सुंदर सा संगम है ।
नई जिम्मेदारीयों को प्रेम से
एक गर्भस्थ अपनाती है,
शांत मन और स्वयं के समझ से
यह चरण पार कर जाती है ।
स्नेहपूर्ण वातावरण माँ का
मनोबल बढ़ाता है ,
कोख में हलचल से माँ के चेहरे
में रौनक बढ़ता जाता है ।
प्रकृति के अद्भुत वरदान से
मन ही मन आल्हादित रहती है,
नव महीने का इंतजार
प्रसन्नता से पूर्ण कर लेती है ।
हर हलचल को महसूस करना
सुखद अनुभव देता है,
प्रेम का यह नन्हा प्रतीक,
प्रीत को और प्रगाढ़ कर देता है।
गोदभराई में दुल्हन जैसे
सुंदर सुंदर सजती कर श्रृंगार ,
नन्हें के आगमन से बढ़ता
चेहरे पर तेज और निखार।
नन्हें जान को देख प्रसव पीड़ा
पल भर में भूल जाती है,
एक नया जन्म स्वयं भी लेती,
बेटी बहू पत्नी से माँ बन जाती है।
-श्रीमती अंजना दिलीप दास
बसना छत्तीसगढ़
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