जमशेदपुर। जमशेदपुर की महिला रचनाकारों के साहित्यिक समूह *फुरसत मे*द्वारा बसंत पचमी, सह सरस्वती पूजा के अवसर पर एक आनलाइन काव्य गोष्ठी #नमामि #शारदे * का आयोजन किया गया। संयोजन अध्यक्ष पद्मा मिश्रा ने किया ।मंच संचालन करते हुए डा मनीला कुमारी ने सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण करते हुए उन्हे ज्ञान सृजन और कलाओं की अधिष्ठाता के रुप में नमन किया। इस अवसर पर प्रथम प्रविष्टि बैंगलोर से पद्मा मिश्रा की थी--तुम पारस मैं अयस अपावन
तुम छू लो कंचन हो जा ऊं।
अअक्षर अक्षर बांध लिया है
भाव सुमन मुक्तहारों से
अब मन का आकाश खुला है
तुम आओ पावन हो जाऊं।
मां का स्नेह सृजन की अद्भुत प्रेरणा है मन के ,जीवन के सभी विकारों को ज्ञान के प्रकाश से आलोकित कर हमें विवेक शक्ति देती है मां वाणी।इसी भाव बोध के साथ सरित किशोरी श्रीवास्तव का कहना था --
-आलोकित कर दो मन मेरा
करुणा स्नेह भरा उपकार
करुँ जन जन का दिन रात
शक्ति दो माँ सेवा अर्चना
करुँ पल पल जन जन का
हे हंसवाहिनी वीणा धारिणी
जय माँ शारदे नित करुँ
आराधना तुम्हारी माँ शारदे
आनंद बाला शर्मा ने हायकू कविता के माध्यम से मां वाणी से बसंत के समान ही स्नेह,प्रेम बांटने की बात की--
बरसा प्रेम
बसंत बनकर
धरती पर,,,हंस वाहिनी
किरण सिन्हा पटना से जुडीं और अपनी रचना पढी '-हे हंस वाहिनी,हे शुभ्र वसना
हे विद्या दायिनी ,हे बुद्धि दायिनी
हाथ जोड़कर माता
निस दिन मैं तुम्हें प्रणाम करूं
शब्दहीन हो गई हूं मां
कैसे तेरा गुणगान करूं ।
लोकगायिका वीणा पाण्डेय भारती--वंदना करूँ मैं तेरी अर्चना करुँ
कैसे तुम्हारी शारदे आराधना करूँ
अज्ञानता मिटा के नई चेतना जगा
जीवन सरल हो जाए ऐसा रास्ता दिखा
चरणों में दो जगह कि मैं उपासना करूँ
कैसे तुम्हारी शारदे आराधना करूँ,कह कर पूरे परिवेश को भावमय बना दिया।
मीनाक्षी कर्ण ने हंसवाहिनी मां शारदे से संसार के मन की कलुषता का नाश कर निर्मल ज्ञान ज्योति प्रदान करने की बात कही -पुस्तकधारिणी, हंसवाहिनी
विद्या,बुद्धि, ज्ञान प्रदायिनी,
हरो माँ जग का तम,
मन की कलुषता,
बहा निर्मल ज्योति.....
जन-जन में,
नव -चेतना,ऊर्जा का संचार कर,
अपने आशीष से कृतार्थ कर।
छंद रचना में कुशल आरती श्रीवास्तव की रचना भाव प्रवाह- में बहा ले गई माँ सरस्वती, हँसवाहिनी,बीणा वादिनी।
सुन लो मेरी पुकार।
मैं अज्ञानी जान न पाऊं
कैसे करूं मनुहार?
इंदिरा पाण्डेय मथुरा से इस काव्यगोष्ठी-में जुडी थीं-,उनकी कविता थी,-हर लो हर तम
हो उजियाला
वीणा वादिनी
भर देना झंकार
गूंजे जीवन
मनीला कुमारी ने दोहा छंदके माध्यमसे अपनी बात कही--वर दो हे माँ शारदे,ज्योति ज्ञान दो दान।
हरो तमसा अज्ञान का ,मिले जगत में मान ॥
माँ कमला पद्मासिनी, मन में करो उजास।
सबके जीवन में सदा, भर दो ज्ञान प्रकाश ॥
सुमधुर गायिका सुधा अग्रवाल ने अपना गीत गाकर समां बांध दियाआज़ माँ भारती ने
सोलहों साज़ श्रृँगार किया,
धानी लँहगा पीली चुनरी से
अपने को सँवार लिया,
इस काव्य गोष्ठी में सभी सदस्यों सरिता सिंह, छाया प्रसाद, उमा सिंह, गीता दुबे,रेणुबाला मिश्र आदि की.शानदार उपस्थिति रही। काव्य पाठ करने वाली सदस्यों को सम्मान पत्र भी प्रदान किये गये।
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