सड़कें अब बुद्धिमान: भारत की स्मार्ट सुरक्षा का नया युग
[टकराव नहीं, तालमेल: वी2वी तकनीक के साथ सुरक्षित ड्राइविंग]
[गति, दिशा और सुरक्षा की संवाद कला: भारत की नई सड़क क्रांति]
• प्रो. आरके जैन “अरिजीत”
भारत की सड़कें आज भी जीवन और सुरक्षा के लिए जोखिमपूर्ण साबित हो रही हैं। हर साल लाखों लोग दुर्घटनाओं का शिकार होते हैं और अनगिनत परिवार टूट जाते हैं। वर्ष 2024 में देशभर में लगभग 1.77 लाख लोग सड़क दुर्घटनाओं में अपनी जान गंवा चुके हैं। इसका अर्थ है कि हर दिन औसतन 485 से अधिक लोग अपने घरों से कभी लौटकर नहीं आते। तेज गति, लापरवाही, हेलमेट न पहनना और यातायात नियमों की अवहेलना प्रमुख कारण हैं। युवा वर्ग (18-34 वर्ष) सबसे अधिक प्रभावित है, जो देश की आर्थिक और सामाजिक शक्ति का अहम हिस्सा है। इन भयावह आंकड़ों ने सरकार को मजबूर कर दिया कि वह सड़क सुरक्षा में क्रांतिकारी बदलाव लाए।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए 2026 तक पूरे देश में व्हीकल-टू-व्हीकल (वी2वी) संचार तकनीक लागू करने की ऐतिहासिक घोषणा की। यह तकनीक वाहनों को सीधे संवाद करने में सक्षम बनाएगी, बिना किसी मोबाइल नेटवर्क या इंटरनेट के। वी2वी तकनीक के माध्यम से वाहन आपस में गति, स्थिति, दिशा, ब्रेकिंग और त्वरण जैसी महत्वपूर्ण जानकारी साझा करेंगे। यदि कोई वाहन अचानक रुकता है, ब्लाइंड स्पॉट में प्रवेश करता है या किसी खतरे का सामना करता है, तो आसपास के सभी वाहन तुरंत चेतावनी पाएंगे। इस प्रकार, दुर्घटनाओं को पहले ही रोका जा सकेगा और लाखों जीवन सुरक्षित रहेंगे।
वी2वी संचार प्रणाली पूर्णतः अत्याधुनिक वायरलेस तकनीक पर आधारित है। प्रत्येक वाहन में एक ऑन-बोर्ड यूनिट (ओबीयू) स्थापित की जाएगी, जो 5.875 से 5.905 गीगाहर्ट्ज़ बैंड में उपलब्ध 30 मेगाहर्ट्ज़ स्पेक्ट्रम का उपयोग करेगी। यह विशिष्ट स्पेक्ट्रम दूरसंचार विभाग द्वारा निःशुल्क आवंटित किया गया है। इस प्रणाली के माध्यम से वाहन रीयल-टाइम में एक-दूसरे के साथ महत्वपूर्ण सूचनाओं का आदान-प्रदान करेंगे, जिससे प्रतिक्रिया समय अत्यंत कम हो जाएगा। कई परिस्थितियों में यही कुछ सेकंड जीवन और मृत्यु के बीच का निर्णायक अंतर साबित होते हैं। विशेषज्ञों और विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह तकनीक दुर्घटनाओं की संभावना को लगभग 80 प्रतिशत तक कम करने में सक्षम है, विशेष रूप से कोहरे, अत्यधिक यातायात और रियर-एंड टक्कर जैसी जोखिमपूर्ण स्थितियों में।
सरकार ने इसे 2026 तक राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने का स्पष्ट लक्ष्य रखा है। पहले चरण में यह केवल नए वाहनों में अनिवार्य होगा। उसके बाद मौजूदा वाहनों में रेट्रोफिटिंग की जाएगी। अनुमानित परियोजना लागत लगभग 5,000 करोड़ रुपये है। प्रति वाहन उपकरण की लागत 5,000-7,000 रुपये के आसपास होने का अनुमान है। राज्य परिवहन मंत्रियों की वार्षिक बैठक में इस योजना पर व्यापक चर्चा हुई। दूरसंचार विभाग के साथ संयुक्त कार्यबल गठित किया गया है। वी2वी प्रणाली एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (एडीएएस) के साथ पूरी तरह एकीकृत होगी। प्रीमियम वाहनों में पहले से मौजूद सेंसर-आधारित फीचर्स को भी नए मानकों से जोड़ा जाएगा। दुर्घटना पीड़ितों के लिए कैशलेस इलाज योजना (1.5 लाख रुपये तक, 7 दिनों के लिए) को राष्ट्रीय स्तर पर लागू किया जाएगा।
वी2वी तकनीक के लाभ अत्यधिक व्यापक और दूरगामी हैं। कोहरे में बहु-वाहन टक्कर, रियर-एंड कोलिजन और स्थिर वाहनों से टकराव अब बड़ी संख्या में रोके जा सकेंगे। यातायात का प्रवाह सुचारू होगा, ईंधन की बचत होगी और वायु प्रदूषण में कमी आएगी। भारत जैसे विविध भूगोल वाले देश में—जहां पहाड़ी रास्ते, घुमावदार सड़कें, घना ट्रैफिक और मौसमी चुनौतियां आम हैं—यह प्रणाली विशेष रूप से उपयोगी साबित होगी। ड्राइवरों को अतिरिक्त प्रतिक्रिया समय मिलने से दुर्घटनाओं की गंभीरता कम होगी और जीवन रक्षा संभव होगी। कुल मिलाकर, यह तकनीक सुरक्षित, स्मार्ट और कुशल परिवहन प्रणाली की नींव रखेगी और नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देगी।
हालांकि, इस योजना के कार्यान्वयन में चुनौतियां भी हैं। प्रारंभिक लागत, पुराने वाहनों में उपकरण इंस्टॉलेशन, डेटा गोपनीयता की चिंता, साइबर खतरों का जोखिम और सभी वाहनों में समान मानकीकरण प्रमुख बाधाएं हैं। सरकार ऑटोमोबाइल उद्योग, विशेषज्ञों और तकनीकी संस्थानों के साथ मिलकर इन समस्याओं का समाधान कर रही है। सफल परीक्षण और समयबद्ध क्रियान्वयन से इन चुनौतियों को प्रभावी ढंग से पार किया जा सकता है। इसके लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान, प्रशिक्षित ड्राइवर प्रशिक्षण कार्यक्रम और सख्त नियमावली लागू करना आवश्यक होगा, ताकि रोलआउट सुचारू और सुरक्षित रूप से संभव हो सके।
इस तकनीक से न केवल दुर्घटनाओं की संख्या घटेगी, बल्कि अनगिनत परिवारों को दुख, पीड़ा और तबाही से भी बचाया जाएगा। यह देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाएगी और सामाजिक सुरक्षा के ढांचे को और अधिक सुदृढ़ और प्रभावी करेगी। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की दूरदर्शिता और सरकार की सक्रियता अत्यंत सराहनीय है। अब समय आ गया है कि हम सभी इस तकनीक को अपनाएं और सुरक्षित यात्रा को अपनी आदत में बदलें। सुरक्षित सड़कें ही विकसित, समृद्ध और सुरक्षित भारत की असली नींव हैं। वी2वी तकनीक केवल एक योजना नहीं, बल्कि हर भारतीय के जीवन की सुरक्षा, संरक्षा और सुरक्षित भविष्य का दृढ़ संकल्प है।
भारत 2026 तक वी2वी तकनीक के रोलआउट से स्मार्ट, सुरक्षित और कुशल परिवहन की एक नई क्रांति की ओर कदम बढ़ाएगा। यह प्रणाली न केवल देश की सड़क सुरक्षा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूती देगी, बल्कि वैश्विक स्मार्ट मोबिलिटी मानकों में भारत को नेतृत्व दिलाकर उसे अग्रणी बनाएगी। जीवन की रक्षा, आर्थिक बचत और पर्यावरणीय सुरक्षा के साथ यह तकनीक हर भारतीय नागरिक के लिए सुरक्षा और भरोसे का वास्तविक वादा है। वर्तमान समय की चुनौती और आवश्यकता यही है कि हम इसे अपनाएं, ताकि सुरक्षित सड़कें सुनिश्चित हों और हर व्यक्ति का जीवन संरक्षित रह सके।
- प्रो. आरके जैन “अरिजीत”, बड़वानी (मप्र)
ईमेल: rtirkjain@gmail.com
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