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मलेशिया दौरा 2026: क्या बदलेगा एशिया का शक्ति-संतुलन? -प्रो. आरके जैन “अरिजीत”, बड़वानी (मप्र)


 

मलेशिया दौरा 2026: क्या बदलेगा एशिया का शक्ति-संतुलन?

[क्या मलेशिया दौरा बदलेगा भारत की पूर्वी दिशा?]

[एक यात्रा, कई संभावनाएँ: मलेशिया की ओर भारत]


प्रो. आरके जैन “अरिजीत”


जब एशिया की जियोपॉलिटिक्स अनिश्चितता और प्रतिस्पर्धा की तेज लहरों से घिरी हुई है, ऐसे समय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 7-8 फरवरी 2026 का मलेशिया दौरा एक साहसी, निर्णायक और दूरदर्शी कदम के रूप में उभरता है। यह यात्रा मात्र औपचारिक कूटनीति नहीं, बल्कि भविष्य की वैश्विक रणनीति को दिशा देने वाला ऐतिहासिक प्रयास है। अगस्त 2024 में संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी में उन्नत करने के बाद यह पहला बड़ा अवसर है, जब दोनों देश अपने संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की तैयारी में हैं। अनवर इब्राहिम के आमंत्रण पर हुआ यह दौरा भारत की एक्ट ईस्ट नीति को नई ऊर्जा देगा और चीन की बढ़ती सक्रियता के बीच संतुलन का स्पष्ट, सशक्त और आत्मविश्वासी संदेश भी प्रस्तुत करेगा।

भारत और मलेशिया के द्विपक्षीय संबंध अब औपचारिकताओं की सीमाओं से निकलकर आपसी विश्वास, सहयोग और साझेदारी की गहराई तक पहुंच चुके हैं। लगभग 2.9 मिलियन भारतीय मूल के नागरिक मलेशिया में दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक, सामाजिक और आर्थिक सेतु की भूमिका निभा रहे हैं। यही सशक्त डायस्पोरा भारत की सॉफ्ट पावर को वैश्विक मंच पर मजबूती प्रदान करता है। मोदी और अनवर की मुलाकात में व्यापार, निवेश, डिफेंस, सुरक्षा, डिजिटल और फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी जैसे अहम विषयों पर ठोस और दूरगामी निर्णय होने की पूरी संभावना है। दसवां इंडिया-मलेशिया सीईओ फोरम इस यात्रा का प्रमुख आकर्षण होगा, जहां भविष्य की आर्थिक साझेदारियों की मजबूत नींव रखी जाएगी।

व्यापार के क्षेत्र में यह यात्रा एक निर्णायक और परिवर्तनकारी मोड़ साबित हो सकती है। मलेशिया का पाम ऑयल, इलेक्ट्रॉनिक्स और तेल-गैस संसाधन भारत की बढ़ती आवश्यकताओं को मजबूती देंगे, जबकि भारतीय आईटी, फार्मा और स्टार्टअप सेक्टर मलेशियाई बाजार में नए अवसरों की खोज करेंगे। दोनों देश व्यापारिक बाधाओं को कम करने, लॉजिस्टिक्स व्यवस्था सुधारने और सप्लाई चेन को सशक्त बनाने पर ठोस सहमति बना सकते हैं। इंडो-पैसिफिक व्यापार गलियारों को गति देकर चीन पर निर्भरता घटाने का प्रयास भी इस एजेंडे का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। मोदी का दृष्टिकोण बिल्कुल स्पष्ट है—व्यापार को केवल आर्थिक गतिविधि नहीं, बल्कि रणनीतिक शक्ति के रूप में विकसित करना।

ऊर्जा क्षेत्र में यह दौरा भविष्य की हरित क्रांति की मजबूत आधारशिला रखने की पूरी क्षमता रखता है। रिन्यूएबल एनर्जी, ग्रीन हाइड्रोजन, क्लीन टेक्नोलॉजी और ऊर्जा संक्रमण पर सहयोग के नए द्वार खुलने की प्रबल संभावना है। मलेशिया के तेल और गैस संसाधन भारत की ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ बनाएंगे, जबकि भारत की उन्नत सोलर और विंड तकनीक मलेशिया को नेट-जीरो लक्ष्य के और अधिक निकट पहुंचाएगी। ऊर्जा संक्रमण से जुड़े संभावित समझौते दोनों देशों को जलवायु परिवर्तन के विरुद्ध एक साझा और प्रभावी मोर्चे पर खड़ा करेंगे। यह साझेदारी आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन का प्रेरणादायक उदाहरण बनेगी।

मैरिटाइम सिक्योरिटी इस यात्रा का सबसे संवेदनशील, रणनीतिक और महत्वपूर्ण पक्ष है। दक्षिण चीन सागर में बढ़ते तनाव के बीच भारत और मलेशिया का नौसैनिक सहयोग क्षेत्रीय स्थिरता के लिए अनिवार्य बन चुका है। संयुक्त सैन्य अभ्यास, इंटेलिजेंस शेयरिंग और मैरिटाइम डोमेन अवेयरनेस को मजबूत करना प्रमुख प्राथमिकता होगी। मलक्का जलडमरूमध्य की सुरक्षा वैश्विक व्यापार की जीवनरेखा है, जिसकी स्थिरता दोनों देशों के साझा हितों से जुड़ी है। यह सहयोग समुद्री सुरक्षा को नई दिशा देगा, जहां साझेदारी टकराव पर भारी पड़ेगी।

इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की नेतृत्व भूमिका इस दौरे के माध्यम से और अधिक सुदृढ़ तथा प्रभावशाली होगी। एक्ट ईस्ट नीति और मलेशिया की लुक ईस्ट रणनीति का संगम एक मजबूत और संतुलित क्षेत्रीय ढांचा तैयार करेगा। इंडो-पैसिफिक इकोनॉमिक फ्रेमवर्क पर होने वाली चर्चा सुरक्षित, पारदर्शी और स्थिर व्यापार मार्गों के विकास में सहायक होगी। क्वाड, आसियान और इंडो-पैसिफिक इकोनॉमिक फ्रेमवर्क के साथ समन्वय बढ़ने से क्षेत्र में संतुलित शक्ति व्यवस्था स्थापित होगी। मोदी का उद्देश्य पूरी तरह स्पष्ट है—इंडो-पैसिफिक को एक शांतिपूर्ण, समृद्ध और सहयोगी क्षेत्र में परिवर्तित करना, जहां विकास और सुरक्षा साथ-साथ आगे बढ़ें।

निवेश के क्षेत्र में यह यात्रा अवसरों के नए द्वार खोलने वाली सिद्ध होगी। मलेशियाई कंपनियां मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत अभियानों में सक्रिय भागीदारी के माध्यम से भारत की विकास यात्रा का हिस्सा बन सकती हैं। सीईओ फोरम में होने वाले समझौते रोजगार सृजन, नवाचार और तकनीकी हस्तांतरण को नई गति प्रदान करेंगे। भारतीय प्रवासी समुदाय निवेशकों और सरकारों के बीच एक मजबूत सेतु की भूमिका निभाएगा। मोदी की उद्योगपतियों से मुलाकात एफडीआई को विशेष रूप से ग्रीन एनर्जी, सेमीकंडक्टर, मैन्युफैक्चरिंग और डिजिटल टेक्नोलॉजी क्षेत्रों में प्रोत्साहित करेगी। यह निवेश साझेदारी आपसी विश्वास, स्थायित्व और दीर्घकालिक सहयोग का मजबूत आधार बनेगी।

सॉफ्ट पावर के क्षेत्र में भी यह दौरा गहरा और दूरगामी प्रभाव डालेगा। स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन, संस्कृति और हेल्थ टेक में बढ़ता सहयोग द्विपक्षीय संबंधों को मानवीय और संवेदनशील आधार प्रदान करेगा। महामारी के बाद हेल्थ टेक और वैक्सीन सहयोग की बढ़ती अहमियत इस साझेदारी को और सुदृढ़ बनाएगी। छात्र विनिमय कार्यक्रम और शोध साझेदारियां ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूती देंगी। सांस्कृतिक कार्यक्रमों और जन-संपर्क से दोनों समाजों के बीच भावनात्मक जुड़ाव गहरा होगा। यह यात्रा प्रमाणित करेगी कि कूटनीति केवल समझौतों तक सीमित नहीं, बल्कि दिलों को जोड़ने वाली निरंतर प्रक्रिया भी है।

प्रधानमंत्री मोदी की मलेशिया यात्रा एक ऐतिहासिक, निर्णायक और दूरदर्शी क्षण के रूप में दर्ज होगी। यह दौरा व्यापार, ऊर्जा, डिफेंस, सुरक्षा और निवेश के नए युग की मजबूत नींव रखेगा। मोदी और अनवर के बीच की सकारात्मक केमिस्ट्री इन समझौतों को व्यवहारिक और प्रभावी रूप देगी। यह केवल दो देशों की औपचारिक मुलाकात नहीं, बल्कि एशिया के भविष्य की दिशा तय करने वाला रणनीतिक प्रयास है। भारत-मलेशिया साझेदारी वैश्विक चुनौतियों के सामने एक सशक्त और अटूट दीवार बनकर उभरेगी। यह यात्रा उम्मीद, आत्मविश्वास और रणनीतिक दूरदृष्टि की प्रतीक बनकर इतिहास में स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज होगी।


प्रो. आरके जैन “अरिजीत”, बड़वानी (मप्र)

ईमेल: rtirkjain@gmail.com

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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