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हथियाने की कला के महारथी - डॉ ब्रजभूषण मिश्र , भोपाल


 

हथियाने की कला के महारथी

      हथियाना,मतलब अन्य की वस्तु,विषय,सिद्धांत,साहित्य, कला धन ,यश प्रसिद्धि,इत्यादि जैसी चीजों  को जबरदस्ती अपना निरूपित करना और उस पर अपना अधिकार दिखाना होता है।इसे कला कहें,गुण कहें,क्या कहें ,जो भी कहें,ये आपराधिक प्रवृति है, जो कम से कम सज्जन व्यक्ति नहीं कर सकता।

इसमें दक्षता सभी के बूते की नहीं हो सकती,यह निर्विवाद सत्य है।

कौन होते हैं वे व्यक्तित्व जो इसका प्रयोग करते देखे जाते हैं आज के भारतीय समाज में।मुझे लगता हैं 

 1 नेता और राजनीतिक दल जो दूसरे की नकल,सिद्धांत और उपलब्धियों पर अपना दावा ठोकते हैं

2  गुंडे और माफिया

3 सिने निर्माता, संगीतकार

4 साहित्यकार

 5 डाकू ,बाहुबली

6 भ्रष्ट अधिकारी

आदि आदि।

हथियाने की कला की महारत नकारात्मक है,अवगुण है,और शर्मनाक और निंदनीय भी,ये महारथी आज के समय में बढ़ते ही जा रहे हैं।जीवन के प्रायः हर क्षेत्र में ये पाए जा रहे हैं,वे सभी स्वयं को भाग्यवान मान सकते हैं जिनका ऐसे व्यक्तित्व से  सामना न हुआ हो।

भगवान बचाए ऐसे महारथियों से ,इनसे हाथापाई भी करना तो अपने हाथ कटवाने जैसा है।कानून का सहारा ही सज्जन व्यक्ति ले सकने का सोच सकते हैं, ऐसे व्यक्तित्व या घटना की चपेट में आने से।

- डॉ ब्रजभूषण मिश्र , भोपाल


देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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