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डा.राजेश श्रीवास्तव की सद्य प्रकाशित कृति - डायरी में राम कहानी लोकार्पित


 

डा.राजेश श्रीवास्तव की सद्य प्रकाशित कृति - डायरी में राम कहानी लोकार्पित 

भोपाल । तुलसी साहित्य अकादमी  की सृजन  श्रृंखला - 53 के अंतर्गत  रामकथा के विद्वान  चिंतक एवं रामायण केंद्र के अध्यक्ष डा.राजेश श्रीवास्तव की सद्य प्रकाशित कृति -डायरी में  राम कहानी - का लोकार्पण एवं साहित्यिक विमर्श दुष्यंत कुमार स्मृति पाण्डुलिपि संग्रहालय में पूर्व सांसद एवं मानस भवन न्यास के कार्यकारी अध्यक्ष श्री रघुनंदन शर्मा की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। 

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मध्य प्रदेश राष्ट्र भाषा प्रचार समिति के मंत्री संचालक एवं मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी के निदेशक डा.विकास दवे जी रहे। सारस्वत अतिथि डा.मोहन तिवारी आनंद, राष्ट्रीय अध्यक्ष तुलसी साहित्य अकादमी मुख्यालय भोपाल तथा विशिष्ट अतिथि रहीं विदुषी लेखिका श्रीमती अनीता सक्सेना जी रहीं। 

मंचस्थ अतिथियों द्वारा माँ वीणा पाणि का पूजन अर्चन एवं दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। सरस्वती वंदना का पाठन एवं स्वागत उद्बोधन वरिष्ठ शिक्षाविद एवं तुलसी साहित्य अकादमी के भोपाल संभाग के संभागीय अध्यक्ष डा.राजेश तिवारी ने दिया।

मंचस्थ अतिथियों ने डा.राजेश श्रीवास्तव की सद्य प्रकाशित कृति -डायरी में राम कहानी - का लोकार्पण किया। तत्पश्चात उन्होंने लेखकीय वक्तव्य में कृति की संरचना के अनुभव पर प्रकाश डाला और चुनिंदा अध्यायों का पाठ किया। 

कार्यक्रम का संयोजन एवं पुस्तक की विस्तृत समीक्षा की, विद्वान साहित्यकार, चिंतक सुरेश पटवा  सारगर्भित समीक्षा करते हुए कहा कि संदर्भित पुस्तक भारतीय ज्ञान परम्परा के संदर्भ में “रामकथा” की ऐतिहासिक विवेचना करती है। यह कृति शोधार्थियों हेतु संदर्भ ग्रंथ का कार्य करेगी। 

श्री रघुनंदन शर्मा ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन कृति डायरी में राम कहानी में  वर्णित श्री राम के पावन चरित्र एवं सुकृत्यों पर गहन प्रकाश डालते हुए लोकार्पित कृति को सनातन संस्कृति की सारगर्भित उपादेयता का मूलाधार निरूपित किया। उन्होंने कहा वर्तमान समाज में ऐसी कृतियों के सृजन की महती आवश्यकता है। यह किताब एक शोध ग्रंथ है। वर्तमान में ऐसी पुस्तकों का सृजन होना चाहिए।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डा. विकास दवे जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि पुस्तक में विमान निर्माण और रामसेतु से अध्याय नई पीढ़ी को परिचित करवाना अनिवार्यता है। यह पुस्तक इस विषय के साथ न्याय करती है। 

सारस्वत अतिथि  डा.मोहन तिवारी  आनंद ने अपने उद्बोधन में कहा - लेखक सृजन का ब्रह्म होता है, उसे अपनी ब्रह्म शक्ति का उपयोग जनोपयोगी कार्यों के लिए करना चाहिए। आधुनिक भौतिकवादी काल में जो भी रचनाकार जनोपयोगी एवं लोकोपयोगी साहित्य का सृजन करेगा उसी का साहित्य कालजयी होगा। डा.आनंद ने -डायरी में राम कहानी - में वर्णित प्रसंगों को सारगर्भित, शिक्षाप्रद् एवं लोकोपयोगी सृजन निरूपित किया।

विशिष्ट अतिथि श्रीमती अनीता सक्सेना ने अपने उद्बोधन में कहा कि राम लोक के नायक हैं इसलिए हर किसी को लगता है राम उसके हैं। रामकथा सिर्फ धार्मिक ग्रंथ नहीं है। रामायण की कहानी भारतीयों के रग-रग में रची-बसी है। 

श्रीमती शशि बंसल ने कार्यक्रम का सुरुचिपूर्ण संचालन किया। श्रीमती सुधा दुबे ने सभी उपस्थित समस्त सहभागी साहित्यकारों का आभार व्यक्त किया तथा स्वल्पाहार के बाद कार्यक्रम समापन की घोषणा हुई। 


डा. मोहन तिवारी आनंद 

राष्ट्रीय अध्यक्ष 

तुलसी साहित्य अकादमी भोपाल।

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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