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प्रधानमंत्री जी के परीक्षा पर चर्चा 2026 का मनोवैज्ञानिक सारांश : लक्ष्य सर्वांगीण विकास होना चाहिए, परीक्षा पास करना नहीं - डॉ मनोज कुमार तिवारी ,वाराणसी


 

प्रधानमंत्री जी के परीक्षा पर चर्चा 2026 का मनोवैज्ञानिक सारांश  : लक्ष्य सर्वांगीण विकास होना चाहिए, परीक्षा पास करना नहीं


- डॉ मनोज कुमार तिवारी 

वरिष्ठ परामर्शदाता 

एआरटीसी, एसएस हॉस्पिटल, आईएमएस, बीएचयू


परीक्षा पर चर्चा 2026 (नवें संस्करण) पर माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने एक कुशल मनोवैज्ञानिक की भाँति विद्यार्थियों से परीक्षा पर चर्चा किया उन्होंने सीधे परीक्षा तनाव पर चर्चा करने के बजाय छात्रों के जीवन व उनके क्षेत्र से संबंधित विभिन्न आयामों पर चर्चा किया जिससे छात्र उनसे सीधे जुड़ सके। प्रधानमंत्री जी ने कहा कि *हर छात्र अव्दितीय है* उनकी अपनी क्षमता, विशेषता, जीवनशैली, सोचने समझने का ढंग अलग- अलग होता है इसलिए विद्यार्थियों का परीक्षा की तैयारी का तरीका अलग-अलग हो सकता है। उन्होंने छात्रों से कहा कि अपनी परीक्षा की तैयारी अपने ढंग से करनी चाहिए, सभी के सुझाव को सुनना चाहिए किंतु *अपने तैयारी का पैटर्न अपने अनुभव के अनुसार तय करना चाहिए।*

प्रधानमंत्री जी ने कहा कि जीवन में ज्ञान एवं कौशल दोनों महत्वपूर्ण है एक के बिना दूसरे का काम चलने वाला नहीं है इसलिए अध्ययन एवं प्रशिक्षण दोनों जीवन में आवश्यक है। उन्होंने छात्रों से कहा कि हमें बीते हुए कल पर नहीं बल्कि अपने वर्तमान एवं भविष्य पर अधिक फोकस करके अपने विकास की तैयारी करनी चाहिए।

प्रधानमंत्री जी ने अपने संबोधन में कहा की प्रश्न-पत्र उन विद्यार्थियों को ही कठिन लगता है जो *पूरे पाठ्यक्रम की तैयारी* न करके सिर्फ परीक्षा को ध्यान में रखकर तैयारी करतें हैं। उन्होंने कहा कि *मन को मजबूत एवं स्वस्थ रखना* उतना ही महत्वपूर्ण है जितना के शरीर को स्वास्थ्य व मजबूत रखना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जीवन परीक्षा के लिए नहीं है बल्कि परीक्षा जीवन में आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक है। विद्यार्थियों को *परीक्षा को बोझ व मजबूरी के रूप में न लेकर जीवन के विकास के लिए आवश्यक मानकर तैयारी करना चाहिए*, जीवन में अंकों का उतना महत्वपूर्ण नहीं होता है जितना की हमारे जीवन में हमारे ज्ञान व कौशल का होता है।

भूलने की समस्या पर चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री जी ने कहा कि विद्यार्थी *जितनी अधिक सलंग्नता के साथ अध्ययन करेगा भूलना उतना ही कम होगा।* छात्रों को लिखकर अभ्यास करने का सलाह दिया क्योंकि लिखकर सीखी गई विषयवस्तु का विस्मरण कम होता है। विद्यार्थियों को आपस में विषय पर चर्चा करना चाहिए *चर्चा के माध्यम से अधिगम मजबूत होता है* तथा संप्रत्यय की समझ स्पष्ट होती है। अभिभावकों को चाहिए कि वह बच्चे को उनकी रुचि क्षमता के अनुसार अवसर व संसाधन उपलब्ध करायें ताकि उनका सर्वांगीण विकास हो सके।

प्रधानमंत्री जी ने कहा कि हमें टेक्नोलॉजी को अपना हथियार बनाना चाहिए कमजोरी नहीं।

प्रधानमंत्री जी ने शिक्षकों को संदेश दिया है छात्रों को प्रश्न पत्र का अभ्यास पर बल देने के बजाय संपूर्ण पाठ्यक्रम को पढ़ने पर जोर देना चाहिए ताकि परीक्षा में कहीं से भी प्रश्न आए तो विद्यार्थी आसानी से हल कर सके।

प्रधानमंत्री जी ने कहा कि *समय व्यवस्थापन जीवन की हर अवस्था में महत्वपूर्ण होता है* छात्र जीवन में यह  अधिक महत्वपूर्ण होता है क्योंकि समय व्यवस्थापन से न केवल श्रम व ऊर्जा की बचत होती है बल्कि सुव्यवस्थित विकास होता है। विद्यार्थियों को चाहिए कि वह घर के सदस्यों से भी परीक्षा पर चर्चा करके परीक्षा तनाव को प्रबंध करें। परीक्षा हाल में तनाव अधिक होने पर लंबी गहरी सांस लेना अत्यंत लाभदायक होता है। *विद्यार्थी को महान लोगों की जीवनी पढ़नी चाहिए तथा उसे अपने आप को जोड़ना चाहिए* इससे निराशा एवं हताशा कम होती है परीक्षा की चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री जी ने स्वदेशी, राष्ट्र प्रेम, जीवनशैली, विकसित भारत, स्वच्छता अभियान, अपने कर्तव्यों का पालन करने तथा तकनीकी के सही उपयोग पर भी बल दिया।

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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