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अखिल भारतीय कलामन्दिर भोपाल ने 'आज की नारी का अवदान ' विषय पर ग्रीष्मकालीन काव्य गोष्ठी की


 

अखिल भारतीय कलामन्दिर भोपाल ने 'आज की नारी का अवदान ' विषय पर ग्रीष्मकालीन काव्य गोष्ठी की

भोपाल ।  विश्व संवाद केन्द्र भोपाल के सभागार में अखिल भारतीय कलामन्दिर संस्था भोपाल म. प्र. का 'आज की नारी का अवदान ' विषय पर ग्रीष्मकालीन काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। मां सरस्वती के छायाचित्र पर पुष्पाहार अर्पण और दीप प्रज्ज्वलित करने के साथ ही श्रीमती सीमा हरि शर्मा ने सरस्वती  वन्दना का गायन किया। कार्यक्रम के अध्यक्ष के रूप में संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. गौरीशंकर शर्मा गौरीश जी ने नारी के अवदान पर प्रकाश डाला, साथ ही संस्था की नवींन कार्यकारिणी के पदाधिकारियों का हार अंगवस्त्र से स्वागत किया गया। मुख्य अतिथि के रूप में निराला सृजन पीठ निदेशक डा. साधना बलवटे जी ने अपने उद्वोधन में आज के समय में हर क्षेत्र में नारियों के द्वारा किये जा रहे श्रेष्ठ कार्यों का उल्लेख करते हुए नारी आज किसी की मोहताज नहीं हैं।। मंच पर संस्था के कार्यकारी अध्यक्ष श्री हरिवल्लभ शर्मा ने कहा सृष्टि भी नारी ही है जिसे संचालित करने में त्रिदेवों को भी देवियों की ओर मुखातिब होना पड़ता है। मंचस्थ नीदरलैंड से पधारे सामवेदी जी ने संस्कृत और संस्कृति में नारियों के अवदान पर चर्चा की। कार्यक्रम का सुन्दर और सरस संचालन डा. अनिता तिवारी जी ने किया। इस काव्य गोष्ठी में लगभग 30 प्रबुद्ध कवियों ने अपनी उत्कृष्ट रचनाओं का पाठ किया। श्री अशोक धमेनियां जी ने -

बुंदेली भाषा कालो करें बढ़ाई हैं।

श्रीमती सीमा शिवहरे-

नव वधु लेती वचन पिया से प्रियवर तुमको आना होगा।

सरोज लता सोनी-

नारी है केवल परिवारों की शक्ति समृद्धि और शान।

नारी के अवदान से होता राष्ट्र समाज युग का निर्माण।।

मृदुल त्यागी-

नारी केवल नाम नहीं,

वह जीवन की गहराई है।

सतीश चंद्र श्रीवास्तव-

जन्म से लेकर मृत्यु तक,

निर्माण से विध्वंस तक। 

हर तरफ नारी नारी, 

नारी फिर भी बनी बेचारी।।

ममता बाजपेई -

जेठ मास को बहुत जी लिया, अब तो सावन होना ही है। 

सीमाहरि शर्मा-

साध कर कर्तव्य सब अधिकार अपने छोड़ती हैं। 

नरियां सारे जगत को टूट कर भी जोड़ती है।।

के. कांत-

जो छूट जाए उस दुनिया से वास्ता क्या है।

मगर इस शहर से निकलने का रास्ता क्या है।।

पुरुषोत्तम तिवारी साहित्यार्थी-

रूठ कर जाना तुम्हारा दे गया उलझन। 

भीड़ में भी लग रहा मुझको अकेलापन।।

कविता शिरोले-

अबला नहीं बला बन जाओ।

मंसूबे खोटे हो जिनके उनके दिलों को दहला जाओ।।

अभिषेक जैन अबोध- 

नारी का होता जहां, आदर अरु सम्मान।

सुख समृद्धि यश बढ़े, सहज राष्ट्र उत्थान।।

रेनू श्रीवास्तव-

सुनो जरा यहां पे अब बदल रही है लड़कियां।

ये वक्त से कदम मिलाकर चल रही है लड़कियां।।

भंवर लाल श्रीवास्तव-

मेरी मां भी नारी थी। 

डॉ कमल किशोर दुबे-

मनुज नहीं भूले कभी, नारी का अवदान।

सृष्टा का तप बल यही, नारी शक्ति महान।।

डॉ शिव कुमार दीवान-

नारी की महिमा बड़ी, नारी शक्ति महान।

नारी सृष्टि की धुरी, जाने सकल जहान।।

बी.एल. गोहिया-

सलिल, सागर, क्षीर नारी।

धरा सी गंभीर नारी।।

चंदर-

मां दी ममता की छांव तले सोने दे।

चांद को खिलौने दे, सपने सलोने दे।।

डॉ गिरिजेश-

हे पुरुष महिला दिवस अबकी वरस।

युगों युगों की राम मिटा देंगे।

सदियों से किया हम पर अन्याय बड़ा

हम इस युग नर नारी का 

डॉ राजेश तिवारी -

कब तक शोषित होती रहेगी बेचारी।

क्या  इस सदी में भी अबला ही रहेगी नारी।।

हरिवल्लभ शर्मा हरि ने -

छुईमुई बनी जहां में लजाती हैं नारियां।

खुशियाँ सबा के संग लुटाती हैं नारियां।

आदि अनेक कवियों ने रचनाएं पढ़ीं

अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. गौरीश जी ने विषय के साथ श्रेष्ठ रचना भी पढ़ी जिसकी सभी ने सराहना की।

अंत में आभार श्री हरिवल्लभ शर्मा ‘हरि’ द्वारा व्यक्त किया गया।

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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