काव्य :
गीत लिखो तुम
कुछ पूजन के गीत लिखो तुम।
कुछ निर्जन के गीत लिखो तुम।
महल अटारी कितने देखे ।
घर आंगन के गीत लिखो तुम।
कैसा रूप अरूप तुम्हारा ।
हां दर्पन के गीत लिखो तुम।
खुशबू दूर तलक जाएगी।
अब चंदन के गीत लिखो तुम।
फूल फूल कलियां चुटकी हैं।
यदि मधुबन के गीत लिखो तुम।
रोम रोम ये पुलकित होगा।
लो चुंबन के गीत लिखो तुम।
कागज से अंतर तक उतरे ।
अपने मन के गीत लिखो तुम।
- आर एस माथुर , इंदौर
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