श्रीअन्न से सशक्त स्वास्थ्य का संकल्प, महाविद्यालय में भव्य व्यंजन मेला
सिवनी मालवा । शासकीय कन्या महाविद्यालय, सिवनी मालवा में दिनांक 25 फरवरी 2026 को पर्यावरण शिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत इको क्लब के तत्वावधान में प्राचार्य डॉ. उमेश कुमार धुर्वे के मार्गदर्शन में “Millet (श्रीअन्न) व्यंजन मेला” का भव्य एवं सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य मोटे अनाज जैसे ज्वार, बाजरा, रागी, कोदो एवं कुटकी आदि के पोषण महत्व, पर्यावरणीय लाभ तथा स्वास्थ्य उपयोगिता के प्रति छात्राओं को जागरूक करना था।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ किया गया। इस अवसर पर प्राचार्य डॉ. आर. के. रघुवंशी (कुसुम महाविद्यालय, सिवनी मालवा), श्रीमती संगीता यादव (बी.आर.सी.) एवं श्रीमती मालती गौर (महिला मोर्चा जिला महामंत्री) विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का औपचारिक अनावरण किया गया तथा छात्राओं को मिलेट्स के महत्व पर प्रेरक संदेश प्रदान किया गया।
कार्यक्रम में महाविद्यालय की छात्राओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए स्वयं निर्मित विभिन्न प्रकार के स्वादिष्ट एवं पौष्टिक श्रीअन्न व्यंजन प्रस्तुत किए। प्रत्येक प्रतिभागी ने अपने व्यंजन में प्रयुक्त मिलेट का नाम एवं उसके पोषण संबंधी लाभों की संक्षिप्त जानकारी भी प्रस्तुत की।
छात्राओं द्वारा प्रस्तुत रागी लड्डू, बाजरे की खिचड़ी, ज्वार रोटी, कोदो पुलाव, कुटकी उपमा आदि व्यंजन विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। छात्राओं ने बताया कि मिलेट्स न केवल स्वास्थ्यवर्धक हैं, बल्कि पर्यावरण अनुकूल फसलें भी हैं, जिनमें कम पानी की आवश्यकता होती है तथा ये बदलती जलवायु परिस्थितियों में भी आसानी से उगाई जा सकती हैं।
इस अवसर पर उपस्थित सभी छात्राओं एवं महाविद्यालय परिवार ने पर्यावरण संरक्षण एवं सतत जीवन शैली अपनाने की शपथ ली तथा अपने दैनिक जीवन में पर्यावरण अनुकूल व्यवहार अपनाने का संकल्प किया।
कार्यक्रम के निर्णायक मंडल में डॉ. सीमा तोमर एवं डॉ. नवनीत सोनारे कुसुम महाविद्यालय से विशेष रूप से उपस्थित रहे।
इको क्लब प्रभारी डॉ. सतीश बालापुरे ने कहा कि यह व्यंजन मेला केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि सतत जीवन शैली को बढ़ावा देने का माध्यम है। उन्होंने मिलेट्स के पोषण महत्व, जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में उनकी उपयोगिता तथा स्थानीय कृषि को प्रोत्साहन देने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने छात्राओं की सक्रिय सहभागिता की प्रशंसा की।
इको क्लब सह-प्रभारी डॉ. रजनीकांत वर्मा ने अपने उद्बोधन में बताया कि मिलेट्स जैव विविधता संरक्षण एवं खाद्य सुरक्षा के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि मोटे अनाज पारंपरिक भारतीय कृषि प्रणाली का अभिन्न अंग रहे हैं तथा वर्तमान समय में इन्हें पुनः अपनाना स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों के लिए लाभकारी है। उन्होंने छात्राओं से आग्रह किया कि वे दैनिक जीवन में सतत जीवन शैली अपनाते हुए पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाएँ।
यह आयोजन छात्राओं के लिए ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायक एवं स्वास्थ्य जागरूकता से परिपूर्ण रहा।
इस अवसर पर प्राध्यापक रजनीश जाटव, मनोज कुमार प्रजापति, धीरेंद्र दुबे, डॉ. मनीष दीक्षित, डॉ. दुर्गा मीना, प्रवीण साहू, डॉ. गजेंद्र वाईकर, डॉ. आकांक्षा पांडे, डॉ. राकेश निरापुरे, डॉ. पदम शर्मा, एवं इको क्लब इकाई की छात्राएँ तथा समस्त महाविद्यालय स्टाफ उपस्थित रहा।
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