काव्य :
सब्ज़ियन करे पुकार
फूलों को सारे देख के,
सब्ज़ियन करे पुकार।
सारे नम्बर उनको देदो,
पर मान रखो जी हमार।
इनकी छटा दो दिनों की,
यादों में सज जाएंगे ये।
जब भी तन-मन टूटेंगे,
तो हम ही काम आएंगे।
मेथी पालक और टमाटर,
जब बरतन में इतरायेंगे।
फ्रैंचबीन और धनियां जैसे,
थाली में मुस्कराएंगे।
होगी तपस्या पूर्ण हमारी,
जब उदरस्थ सारे हो जाएंगे।
--- डा.ऋषु, छिंदवाड़ा (म.प्र.)
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