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“वागेश्वरी साहित्यिक एवम सांस्कृतिक मंच” की वसन्त काव्य गोष्ठी संपन्न


 

“वागेश्वरी साहित्यिक एवम सांस्कृतिक मंच” की वसन्त काव्य गोष्ठी संपन्न  

भोपाल । क्रिस्टल आइडियल सिटी अवधपुरी भोपाल में "वागेश्वरी साहित्यिक एवम सांस्कृतिक मंच ,भोपाल के तत्वावधान में "आओ बसंत अभिनंदन है" एक शानदार काव्य गोष्ठी  का आयोजन किया गया।जिसमें राजधानी भोपाल के कई ख्यातिनाम कवि एवम कवियत्रियों ने अपनी कविताओं का पाठ किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार ऋषि श्रृंगारी ने की, मुख्य अतिथि के रूप में डॉ मोहन तिवारी आनंद , विशिष्ट अतिथि श्री सुरेश पटवा , सारस्वत अतिथि श्रीमती रूपाली सक्सेना एवं संस्था के संरक्षक आदरणीय डॉ गिरीश दुबे "बेधड़क" उपस्थित रहे। कार्यक्रम संचालन सत्यदेव सोनी"सत्य"द्वारा किया गया।

 गोष्ठी का शुभारंभ मां सरस्वती की प्रतिमा के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलित कर हुआ। एवम सभी कवियों का स्वागत पुष्पहार द्वारा किया गया। कार्यक्रम में वाणी वंदना सुनीता शर्मा "सिद्धी "द्वारा प्रस्तुत की गई। जिसमें उनके द्वारा  'हर अक्षर के सार में वीणा के संस्कार में"" कहकर वाणी आराधना की गई। गोष्ठी में ऋषि श्रंगारी ने अपने छंद पढ़ते हुए कहा

"मेघना ने जब तड़प कर , रूपसी का तन छुआ है।

है मदन ऋतु भीगने को, बावरा  ये  मन  हुआ है।।

डॉ गिरीश दुबे "बेधड़क "ने हास्य रचनाओं से मंच को समृद्ध किया। 

डॉक्टर मोहन तिवारी आनंद ने कविता पाठ कर तालियाँ लूटीं। सुरेश पटवा ने “वजन उठाती हैं औरतें” सुनाकर श्रोताओं को मंत्र मुग्ध कर दिया। कैलाश मेश्राम में “एक प्रणय की साधिका का कौन सा विचलन लिखूँ” सुना वाहवाही लूटी। काव्यपाठ करते हुए सत्यदेव "सत्य" ने पढ़ी होना चाहो अगर सुगंधित, मकरंदों की बात करो।

अंतस उपवन महक उठेगा, गुलकंदों की बात करो।।

इसके बाद राजेश विश्वकर्मा ने काव्य पाठ करते हुए कहा"सरस्वती सुवासिनी सुभाषिनी माँ शारदे। विमलमति को धारती विमलमति ही धारते।"

गोष्ठी में सरोज लता सोनी ने बसंत ऋतु के मनमोहक छंदों एवम देशभक्ति गीत का काव्यपाठ किया।

रूपाली सक्सेना ने अपनी रचना प्रस्तुत करते हुए पढ़ा"

सुनो जब बात होती है तुम्हारे ही खयालों से।

लगे हैं नैन दो जैसे छलकते जाम प्यालों से।।"

"ऋतु वसंत का आगमन, नव उमंग, नव आस।

आम्र बौर सरसों खिली, कण-कण में उल्लास।।

बालकवि अथर्व सोनी "अर्थ"ने कहा "पूरा साथ निभाऊंगा मै बच्चा नही समझना "और भरपूर तालियां बटोरी।

धर्मदेव सिंह ने पढ़ा "गिरा  दे  जुल्फ  जो  अपनी, वही  बरसात हो जाए।

उठा  कर  देख  ले  पलकें, उजाला  साथ हो जाए।।

इसके बाद गोष्ठी में दिनेश गुप्ता "मकरंद "कीर्ति सिंह ,सत्यदेव "सत्य", रेणु गोस्वामी ,सुनीता शर्मा "सिद्धी", अभिलाषा श्रीवास्तव, डॉ प्रियंका श्रीवास्तव प्रियंजलि,चंदन सिंह,शशि सिंह,विनोद भारती ,सुगंधा भरती,सोनम ,वंदना, सरोज लता सोनी, कमलेश नूर, रेनू श्रीवास्तव ,वाल्मीक प्रसाद, डॉ रेखा नायक, अरविंद तिवारी, राजेश प्रसाद,शशि कुमार जी आदि ने भी काव्यपाठ किया। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित श्रोताओं ने भरपूर तालियां बजाकर कार्यक्रम का आनंद लिया।

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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