काव्य :
जो मैंने पाया
मैंने इस जीवन में देखा
मैने इस जीवन में पाया
हर खुशी, हर वो पल
जो मेरे सपनों में छाया
क्या तुम भी यह कर सकते हो
क्या तुम भी यह पा सकते हो
जो मैंने पाया...
माता पिता की छाया में
वो पल जो मैंने बिताया
जीवन के संघर्षो पर
मुझे खड़ा होना सिखाया
क्या तुम भी यह कर सकते हो
क्या तुम भी यह पा सकते हो
जो मैंने पाया ...
- नवन्तिका यादव, प्रयागराज
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