काव्य :
ग़ज़ल
ज़िंदगी के सफ़र में साथ होते तो अच्छा होता
कुछ दूर ही साथ चलते तो अच्छा होता
गुमराह होते अगर राह में कभी हम
रोशनी दिखाते तुम मुझे तो अच्छा होता
चुभ जाते जो काँटें कभी पांव में
अपने हाथों निकाल देते तो अच्छा होता
जीवन नैया भँवर में जो कभी फँसती
पतवार बन किनारे लगाते तो अच्छा होता
मैंने कुछ खास की चाहत कभी न की
बस!हरदम साथ निभाते तो अच्छा होता
विरानगी लिए हुए जिनदगी में जो तुम
बहार बन खुशियाँ लुटाते तो अच्छा होता
- डॉ मंजू लता , नोएडा
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